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कविता का आनंद ….!

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Hindi Poetry

 कविता  का  आनंद ….!

जिनका मन इक कविमन  है
उनका  जीवन  सार्थक  है  ….

मन  में  द्वंद  भरे  इतने
बचैनी  दुःख   देते   हैं
कविता  में  ढल जाते  जब
द्वन्द  मित्र  बन  जाते  हैं
कैसे  समझाएँ  हम  ये
सब  दुःख  यूं  सुख बनते हैं 

कविता  देवी  के  प्यारे
कविता  जो  लिख  पढ़  पाते
कविता  की ही  करामत ये
स्वर्ग  यहीं  पे  सजाते  हैं ……

जिनको  प्यारी  कविता  है
जीवन  का  अमृत   पीते
इस  अद्भुत   मदहोशी  में
मदहोश  हो  जीते  हैं …..

” विश्व नन्द  “

14 Comments

  1. Siddha Nath Singh says:

    kaash dusre log bhi aisa hi sochte.

    • Vishvnand says:

      @Siddha Nath Singh ,
      प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक धन्यवाद
      दूसरों का क्या; गर ऐसा सोचेंगे और करेंगे तो खुद भी ऐसे ही आनंद का आनंद लेंगे .. 🙂

  2. U.M.Sahai says:

    सही कहा आपने,विश्व जी. पर अक्सर लोग कवियों से बचना ही चाहते हैं, कि कहीं वो अपनी कविता न सुनाने लग जाएँ.

    • Vishvnand says:

      @U.M.Sahai ,
      आपकी बात तो ठीक है पर इसका अब तक इलाज़ नहीं है
      कविता जब कोई लिख जाती लगता सुनाना अपना फर्ज़ है

      औरों को भले सर दर्द हो कहता जाता शायर ” अर्ज है … ”
      समझ के भी आदत ना छूटे जाने कैसा ये मर्ज़ है….

  3. jaspal kaur says:

    Very true, sir. Nicepoem.

  4. santosh bhauwala says:

    कविता लिख,सुना कर कवि ने आनंद पाया
    जो कोई न सुनना चाहे, कवि ने क्या खोया
    वही कविता न सुन, खूबसूरत भावनाओं के
    सागर में गोता लगाने से वंचित रह गया
    सादर
    संतोष भाऊवाला

    • Vishvnand says:

      @santosh bhauwala,
      इस सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए सतशः आभार

      जब कविता उभर लिख जाती कर मन के भावों को साकार
      कवि खुद लेता पढ़ इस प्रयास और कृति का आनंद अपार
      और इस आनंद को मान कर प्रभु का वर उपकार और प्यार
      चाहता बांटता रहना प्यार से बीच अपने दोस्त परिवार ….
      जानना चाहता क्या उन्हें भी आया इस कृति को पढ़ आनंद और प्यार….

    • Vishvnand says:

      @santosh bhauwala ,
      और हाँ एक बात और
      अक्सर हम ही कवि लोग अपनी कविताओं में ही मशगुल होकर खुद ही ये भूल जाते हैं या इसको उतना आवश्यक नही समझते हैं कि जैसा हम अपनी कविताओं के बारे में अपने दोस्तों से प्रोत्साहन और मार्गदर्शन चाहते हैं वैसे ही अपने अन्य कवि मित्र यही बात हमसे भी चाहते हैं इसे हमें कतई नहीं भूलना है और यही तो रचनाएँ यहाँ sharing का अर्थ भी है l हमें भी अन्य कवियों की यहाँ पर पोस्ट की गयी और पढी हुई कविताओं पर अपने कमेन्ट देना चाहिए ऐसा मैं मानता हूँ …

      • santosh bhauwala says:

        बहुत सही कहा आपने…. मै भी सहमत हूँ आपकी इस बात से !!!
        सादर
        संतोष भाऊवाला

        • Vishvnand says:

          @santosh bhauwala ,
          हार्दिक शुक्रिया l आप जैसे कमेन्ट देते हैं देते रहिये..
          रचनाएँ पढ़कर उनपर कमेन्ट देते देते खुद ब खुद नयी रचनाएँ खुद को ही सूझने लगती हैं और लिख दी जाती हैं ऐसा मेरा अनुभव है …. ..

  5. parminder says:

    क्या खूब लिखा है! सही है, कविता में खोकर सब कष्ट भूल जाते हैं या कष्टों में कविता गूढ़ मित्र का भी काम करती है| दो लाइनें हैं
    ” I write because I cannot fight
    This is the way the week ones fight”

  6. Kusum Gokarn says:

    To a poet poetry comes naturally likes leaves to a tree,
    whether the reader likes it or not.So one must keep on writing with an attitude of take it or leave it.
    Kusum

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