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—–/ तेरे दिल में कुछ तो पलता है /—–

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Hindi Poetry

तेरे दिल में कुछ तो पलता है /
बतला दे क्या क्या होता है //

तुझे नींद तो क्या आती होगी /

तुझे यादे बहुत सताती होगी /

आहट कोई छल जाती होगी /

उम्मीद खाली खल जाती होगी /

होती होगी परेशा ,

बिन मिले जब दिन ढलता है /

तेरे दिल में कुछ तो पलता है /

बतला दे क्या क्या होता है //

मिलने का जी करता होगा /

मिलने पर मगर डरता होगा /

तन्हां हो आहे भरता होगा /

सुनी राहें तकता होगा /

बैचेन तू होती होगी ,

जब साँझ का दीया जलता है /

तेरे दिल में कुछ तो पलता है /

बतला दे क्या क्या होता है //

कहना चाहे ,कह ना पाते /

आती होगी दिल में कई बाते /

होती होगी जब मुलाकाते /

ख्याल सब दिल में रह जाते /

जानकर भी उसका ,

अनजानापन खलता है /

तेरे दिल में कुछ तो पलता है /

बतला दे क्या क्या होता है //

7 Comments

  1. rajendra sharma "vivek" says:

    Nikharaa huaa jeevan kab kisako milataa hai
    har ek dil me kuch n kuch to palataa hai
    rah jaati hai aashaaye jeevan me adhoori
    aasthaao ka dharaatal pairo tale
    fisalataa hai

  2. Harish Chandra Lohumi says:

    बहुत सुन्दर रचना.
    बहुत दिनों से एक बात पूछना चाह रहा हूँ चौहान साहब , आपकी रचनाओं में. अक्सर “/” विराम का प्रयोग होता है. यह चिन्ह कहाँ पर और क्यों प्रयोग में लाया जाता है, जानने की उत्सुकता सी है.

    • Narayan Singh Chouha says:

      हरीशजी ,
      मै कोई बहुत बड़ा साहित्यकार नही हूँ … आपकी जिज्ञासा को शांत कर सकू …….?..
      बस इतना ही कहूँगा की आप अपनी रचनाओ में अंग्रेजी का फुलस्टॉप {.}जहा लगते है वही में {/} लगता हूँ /

  3. Vishvnand says:

    अच्छी रचना मनभायी

    उनके दिल में सच क्या होता है
    कहाँ किसे पता चल पाता है
    हमारा दिल ही mood में अंदाज़ लगाता रहता
    क्या क्या उन्हें होता हो और क्या नही होता है 🙂

  4. kailash jangid says:

    getting bit paranoid?

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