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पतझड़ को प्रणाम

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Hindi Poetry, Jun 2012 Contest

                                पतझड़

 पतझड़ है आलेख प्रकृति के उन सोपानों का |

भीषण तपन शिशिर वर्षा आंधी तूफानों का ||

जिनको सह कर भी न डिगा अपने कर्तव्यों से |

शोधित पर्यावरण किया आजीवन पूरी निष्ठा से ||

स्वागत में बसंत के जिसने किया रिक्त है सिंहासन |

उस पतझड़ को करता है यह कृतज्ञ जग करबद्ध नमन ||

8 Comments

  1. Vishvnand says:

    अतिसुन्दर भाव और कल्पना
    बहुत मन भायी रचना
    Commends

  2. Harish Chandra Lohumi says:

    बहुत सुन्दर और ज्ञान वर्द्धक !
    पतझड़ का समर्पण . वाह !

  3. U.M.Sahai says:

    शुद्ध हिंदी को प्रयोग कर लिखी गयी एक सुंदर रचना. बधाई. पतझड़ न हो तो बसंत का मज़ा ही न आये.

    • dr.o.p.billore says:

      @U.M.Sahai, आदरणीय सहाय साहेब रचना की मंशा को पहचान कर उसकी सराहना के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद |

  4. nish1603 says:

    अति उत्तम रचना…!!

  5. dr.o.p.billore says:

    रचना पर ध्यान देने और सराहना करने के लिया आपका बहुत बहुत धन्यवाद |

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