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श्वेत और श्याम

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Hindi Poetry

 

श्वेत और श्याम

 

कहाँ गए वो रंग,

जो लाये थे हम और तुम,  

चुन चुन कर,

इस झोली में .

 

तुमने भी तो नहीं चुराए हैं,

फीके-फीके जो लग रहे हो,

कुछ तो बताओ,

क्यों रह गए अब,

सिर्फ..

श्वेत और श्याम .

 

 

***** हरीश चन्द्र लोहुमी 

8 Comments

  1. Vishvnand says:

    वाह क्या अंदाज़ है
    सोचते सोचते नही लगा पा रहे विचारों को लगाम
    बड़ी रगीली रचना लगी सुन्दर चित्र के साथ ये आपकी “श्वेत और श्याम”

    देर आये दुरुस्त आये
    अपनी छबि साथ लाये

    • Harish Chandra Lohumi says:

      @Vishvnand, हार्दिक आभार और धन्यवाद सर ! आशीर्वाद बनाए रखियेगा .

  2. siddha nath singh says:

    shaam dhalne pe yahi rang bache rahte hain
    aap kya jaano ki ham kaun sa dukh sahte hain.

  3. dr.o.p.billore says:

    रंग रंगीला ले गया दे व्याकुलता को विराम |
    पुनः रंग भरलो प्रिये शेष श्वेत और श्याम ||
    सुन्दर रचना | बधाई ||

  4. U.M.Sahai says:

    कविता व फोटो दोनों ही बहुत प्यारी हैं, बधाई हरीश जी.

  5. Narayan Singh Chouha says:

    बहुत बढिया रचना

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