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मैं चाहता हूँ मुझ पर भी पतझड आये

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Apr 2011 Contest

मैं चाहता हूँ मुझ पर भी पतझड आये
साल भर वक़्त के तेवर देखूं
फिर मेरे भी पत्तों का रंग बदल जाये …….
मैं चाहता हूँ मुझ पर भी पतझड आये

जब भर जाये शाखाएं मेरी इतनी
की कोई जगह न रह जाये ………….
तब में चाहता हूँ की मुझ पर भी  पतझड आये

जब जानना चाहूँ मैं खुद को
तब कोई पर्दा खुद से न रह जाये
तब में चाहता हूँ की मुझ पर भी  पतझड आये

5 Comments

  1. praveen gupta says:

    good one…:)

  2. Abhishek Khare says:

    Nice one, keep sharing.

  3. Vishvnand says:

    सुन्दर रचना
    मानभायी कल्पना
    खासकर अंतिम छंद की भावना

  4. Siddha Nath Singh says:

    punarnavikaran kee utkat aaakanksha ko prativimbit kari achchhi rachna.

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