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———- बेदाग निकल गए——-

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Hindi Poetry

जलाने को आई वो आग निगल गए /
काजल की कोठारी से बेदाग निकल गए/
हंसो के भ्रम में मोती की आश पाल बैठे ,
परखा तो जाना की वो काग निकल गए /
बिन सोचे बेवफाई का इल्जाम लगा दिया ,
जानी जब सच्चाई दिल के दाग निकल गए /
एहसानों का कितना था कर्ज हम पर ,
अदा किया फर्ज ,बेबाग निकल गए /

2 Comments

  1. s.n.singh says:

    bebaag to nahin bebaak nikalte suna tha.

  2. Vishvnand says:

    रचना ये आपकी ज़रा कुछ लय में कम लगी
    लगता है पोस्ट क्या इसे जल्दी में कर गए ?

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