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दिल की आरज़ू

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Hindi Poetry, Uncategorized

मैं हर दरियां पार कर लेता, जो नज़र के आगे देख पाता,
डर कर वक़्त की लहरों से, अपनी नौका ना घुमाता,,
वो काली गहरी रैना भी, रोशन हो मुझे रास्ता दिखाती,
जो ख्वाइशो से अपनी सितारें बना, आसमान में सजाता…!!

4 Comments

  1. Vishvnand says:

    और थोड़ा सा गर तेरा वो प्यार मिल पाता

    बहुत खूब मन भायी

  2. nish1603 says:

    धन्यवाद विश्व जी…!!

  3. Siddha Nath Singh says:

    achhi lagi .

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