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आज बंद है!

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Hindi Poetry

आज बंद है!

चारों ओर आनंद ही आनंद है……
क्योंकि भैया आज तो भारत बंद है…….
परांठों की फरमाइश बिस्तर से करेंगे,
और मजा लेंगे बीती रात वाले क्रिकेट मैच का,
न सुनना पडेगा जल्दी करो…जल्दी करो….
न भागमभाग होगी, सब्जी- राशन लाने की,
आज तो भारत बंद है……..

फूटेंगे बम पीछे वाली रेल लाइन पर,
बंद होता कैलेण्डर में तो न करते सफ़र,
बेकार टूटा, पुराना, सामान जैसे टायर,
जलेगा, फुकेगा, काले धुंएँ से लिखेगा कि
हम हैं आजाद, और आज भारत बंद है…….

मुक्त कंठ से नारे बाजी…हाथ में झंडे,
गुल्ली- डंडे… दिन है करने का मनमानी,
क्रिकेट-मैच हो बीच चौराहे, बच्चों ने है ठानी,
हार-जीत, क्या खोया-पाया, कल सोचेंगे,
त्योहारों सी खुशी मनाओ, आज भारत बंद है……

बंद-बंद की खुशी मनाते भूल गए हम काम करना,
भूल गए सचमुच में हमको, चाहिए क्या बंद करना,
थूकना सीढियों पर, कोनों में पेशाब करना,
अपने घर का कूड़ा-करकट, फैलाना सडकों पर,
बंद करो गाली-गलौच और बंद करो राजनीति,
सच्चे अर्थों में तो भैया तब ही, बंद का आनंद है……..
बंद का आनंद है……..

सुधा गोयल “नवीन”

13 Comments

  1. suresh says:

    बहुत सुन्दर रचना ..बधाई बधाई

  2. Vishvnand says:

    अर्थपूर्ण सुन्दर रचना
    मन को झकझोरती हुई बहुत भायी

    बंद से क्या हो जाता है अन्याय का रुकना
    बंद से क्या रोक सकते है बुरी नीतिओं का चलना
    बंद के बाद क्या अच्छे से हो पाता है हुए नुकसान का भर पाना
    इसपर ही निर्भर करता है ऐसे बंद का उचित होना या न होना

    “थूकना सीढियों पर, कोनों में पेशाब करना,
    अपने घर का कूड़ा-करकट, फैलाना सडकों पर,
    बंद करो गाली-गलौच और बंद करो राजनीति,”
    सच इसके लिए क्यूँ नहीं करते ऐसे ही बंद की नीति

    • sudha goel says:

      @Vishvnand, सर, कविता पर लिखी आपकी कविता बेजोड़ है. असंख्य, अनगिनत रचनाओं के लिए आप निश्चय ही बधाई के पात्र हैं.

  3. Reetesh Sabr says:

    सुधा जी…जो बहुतों के मन में पले, कवि उसको आकार दे और फिर विस्तार दे के पहुँचे वो और फ़ैल जाए चेतना के आकाश में.
    आपने कुछ ऐसी ही गागर में सागर संजोया है…उम्मीद है पढ़ने के रस के साथ करने का रस भी रास आएगा सबको!!!

  4. Narayan Singh Chouha says:

    वास्तविकता को छूती रचना …..बहुत खूब sudhaji

  5. बंद से बचत भी होती है और नुकसान भी लोकतंत्र की आवश्यक बुराईहै
    आपकी रचना अच्छी है धन्यवाद

  6. pankaj jha says:

    narivadi rachna hai

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