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—–गणेशजी ने जब दूध पिया———–

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Hindi Poetry

बही दूध की धार /

दौड़े आये तेरे द्वार /

हुआ कैसा चमत्कार /

चकित हुआ है संसार //

कौई काम करता नही तू व्यर्थ /

समर्थ बतला दे तू इसका अर्थ //

ये महामानव के आने का , क्या है संकेत /

जन्मा है राम कही ,या पैदा हुआ है लंकेश /

बदल कर अब कौन सा ,आया है भेष /

आया किस अवतार में तू गणेश /

खींच लाया धरा पर क्या ,मानव का दर्द /

समर्थ बतला दे तू इसका अर्थ //

क्या घटने वाला है कौई अनिष्ट /

या काम होने वाला है कौई विशिष्ट /

मौन सब मौन ग्रन्थ ,मौन है वरिष्ट /

तू ही है सर्वज्ञ ,तू ही है बलिष्ट //

हो तो नही गया कही हमसे अनर्थ /

समर्थ बतला दे तू इसका अर्थ //

विज्ञानं का ज्ञान इसे ,कहता प्रष्ट तनाव /

श्यानता, गुरुत्वाकर्षण का अब क्यों है अभाव /

बदले है नियम क्यों बदले स्वभाव /

दूध से रहा नही अब क्यों लगाव //

मानव के ज्ञान पर छाई है गर्द /

समर्थ बतला दे तू इसका अर्थ //

कौई आर .एस .एस .की चाल कह पुकारे /

कौई अंध विश्वास,कह इन्कारे /

आँखों देखी बात को क्यों ना स्वीकारे /

ईश्वर के कृत्य सब होते है न्यारे /

ढूंढते है लोग अब ,तेरी लीला में भी स्वार्थ //

समर्थ बतला दे तू इसका अर्थ //

27/09/1995 को ये कविता गणेशजी की मूर्तियों द्वारा दूध पीने की घटना के बाद मैंने लिखी थी ……

7 Comments

  1. Vishvnand says:

    विषय पर सुन्दर रचना
    अर्थपूर्ण और मनभावन ; बधाई
    (कुछ शब्द गलत छपे हैं उन्हें edit कर सुधारने की जरूरत है )

    मेरे जैसे भाविक को लगा इस चमत्कार में हों बहुत से अर्थ
    विज्ञान के ज्ञानी नास्तिक कहते हैं चमत्कार कुछ नहीं ये है व्यर्थ
    श्री गणेश भगवान् सब देख हंस रहे हैं जो ही जानते सब बातों का असली अर्थ ….

    • Narayan Singh Chouhan says:

      @Vishvnand,
      धन्यवाद….विश्वनादजी ……टाइप में समस्या आ ही जाती है .आपका मार्गदर्शन मिलता रहे ….
      एडिट वाले शब्दों पर ध्यान आकृषित कर देते तो मेहरबानी होती …..

      • Vishvnand says:

        @Narayan Singh Chouhan,
        मेरे ख्याल में निम्न शब्द गलत छपे हैं

        पीया = पिया, खिंच = खींच, श्यानता = ?, गुरुत्वकर्ष्ण = गुरुत्वाकर्षण , चल = चाल , विश्वाश = विश्वास,
        कृत्या = कृत्य
        शायद मेरे सुझाव में भी कुछ गलतियां हो कह नहीं सकता
        आशा रहती है कि कमेन्ट पढ़ Author खुद संशोधन करें तो बेहतर हो और समय की बचत भी…

  2. Rajendra sharma"vivek" says:

    Dugdh piyaa ganraaj ne.rahaa abhi tak raaz
    he lambodar mile hame,prgyaa,yash, pad raaj.

  3. dr.o.p.billore says:

    सुन्दर रचना बधाई |

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