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आओ बैठें बात करें

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Hindi Poetry, Podcast
 

आओ बैठें बात करें
वो जो अपने साथ करे हैं
हम भी किसी के साथ करें.

वादे करना भी आता है
झूठ से बचपन का नाता है
गली, मोहल्ले, गाँव का नुक्कड़
खेतों से शुरुआत करें.

हम हों साहब बड़े सयाने
अन्दर क्या है – कौन है जाने?
पौलीस्टर की चड्ढी हो पर
खादी की बरसात करें.

अंतरतम का जितना क्षय हो
उससे ज्यादा धन संचय हो
स्वाभिमान की खाट बिछाकर
बात-चीत दिन रात करें.

वो जो अपने साथ करे हैं
हम भी किसी के साथ करें.

6 Comments

  1. Vishvnand says:

    रचना outstanding और बहुत प्रशंसनीय .
    अंदाज़े बयाँ उत्कृष्ट और गहन है
    अन्तर्मन को हिला गया है
    क्या बात है

    १०/१०

  2. santosh bhauwala says:

    बहुत खूब !!! अच्छी रचना बधाई !!

  3. parminder says:

    अंतर्मन शायद उतना ज़रूरी नहीं रहा, दुःख की बात है, बदला और धन ही सब कुछ है, इंसान घाव देकर खुश है, हैरानी की बात है!

  4. Aditya ! says:

    “आओ खामोश बैठ बातें करें..” 🙂
    सुन्दर रचना.

  5. Vishvnand says:

    अब पॉडकास्ट के साथ तो रचना और भी निखर आई है
    हार्दिक धन्यवाद

  6. sushil sarna says:

    गहन भाव लिए रचना और उसपर आवाज ने उसे और भी असरदार बना दिया है-भाव मन को छू गए-बधाई विकास जी

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