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डायन

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Hindi Poetry

डायन
सुधा गोयल “नवीन”

  दागी गई, मारी गई लातों से, घूसों से, चप्पलों से….
 आरोपी थी कि वह एक डायन है…

  कसूरवार ठहराई गई, जो कसूर उसका तो कदापि न था……
  गाँव में हैजा फ़ैलने का, खड़ी फसल पर पाला पड़ने का,
  घर-घर फैले माता के प्रकोप का,
  आंधी तूफ़ान मूसलाधार बारिश का,

  हुकुम हुआ …पूरे गाँव में ….
 नंगी नचवाने, बाल मुड़वाने,
  और दहकते अंगारों पर चलवाने का…..
  ऐसे न मरी तो शर्म से मर ही जायेगी….. …

  फिर उस विधवा के नाम की बीस बीघा जमीन
  एक पक्का घर, चार भैंसे ..
  और एक कुंएं पर हक़ होगा
 गाँव के अन्नदाताओं का,
 पंडितों पुरोहितों का, परम्परा के रखवालों का…..

 आसान कितना आसान तरीका
  सुख समृद्धि पाने औ प्रकोप से बचने का….
  सिद्ध कर दो कि वह डायन है……
  डायन है…..

सुधा गोयल “नवीन”
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10 Comments

  1. s n singh says:

    प्रपंच इस दुनिया को ऐसे ही थोड़े कहा जाता है, पञ्च आज कल अंगरेजी के पञ्च मार रहे है और गाँव की सादगी और भलापन मंच करते जा रहे हैं.सौ टंच खरी बात कहना कितना जोखिम भरा हो गया है ye मंजुनाथ से पूछो.

  2. yugal says:

    नारी उत्पीडन के न जाने कितने आयाम है,उसकी त्रासदी उसकी व्यथा की ना जाने कितने रंग है, ऐसा ही एक खंजर है,एक शब्द-डायन
    जिससे सामाजिक और मानसिक रूप से किसी नारी की हत्या कर दी जाती है, अच्छी कविता.

    • sudha goel says:

      @yugal, कविता की सराहना के लिए धन्यवाद! आज भी नारी की दशा कोई कम शोचनीय नहीं है समाज की मानसिकता पर तरस आता है. फिर जन्म लेती है कविता.

  3. Vishvnand says:

    Very telling poem of the ghastly unfortunate situation still existing in our country under the very nose of our present ineffective and mal – Administration aided by a Judiciary system which takes ages to conduct trials & unable punish goondas & corrupt criminals who take law in their own hands and harass /punish/murder good people whoever come in their way of looting & harming the innocent public.
    We may not be very far from an absolute Goonda Raj.

    Kudos for the poem

    9/10

    • sudha goel says:

      @Vishvnand,
      एक मन को भी झिंझोड़ दे तो कविता लिखना सार्थक हो जाता है .
      धन्यवाद !

  4. santosh bhauwala says:

    बहुत अच्छी रचना, अंतर्मम को झंझोरती ,नारी को लांछित कर सुख समृधि की प्राप्ति ,गाँवों में यह अवधारणा लाइलाज है
    संतोष भाऊवाला

    • sudha goel says:

      @santosh bhauwala, मानवीय मूल्यों पर स्वार्थ इतना हावी होचुका है कि डायन जैसी कविता जन्म लेती है.

  5. parminder says:

    आज भी कितने दुर्व्यवहार एवं प्रताड़ना सह रही है नारी, जागरूक कहते तो हैं, पर लगता नहीं कहीं भी इसका असर हुआ है, खासकर छोटे कस्बों में, जिसका चित्रण आपने बखूबी किया है |

  6. sudha goel says:

    The poem is so reality-based and it can be so true for some women. The helplessness on part of these women is heart breaking. There are so many changes have taken place in relation to “Women’s Status in Society” but more work needs to be done- the biggest challenge is to empower women and educate them for their rights.

    Rajnu

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