« »

–// ये जाँ है माँ भारती के लिए //–

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

इश्क में हर बात मुनासीब नही /
यार प्यार ही तो सब कुछ होता नही //

है बंधन जीवन के और कई ,
नाते रिश्ते भी कितने निभाने है /
होती बहार किसी एक चमन की नही ,
मुझको सारे ही गुल खिलने है //

पदचाप बना दे पगडण्डी कोई ,
राह की ऐसी कोई मै धुल नही /
बिछ जाना है सबकी राहों में ,
ऐसा फुल हूँ कोई शूल नही //

है मर्यादा कहाँ गगन की कोई ,
मुझको सारी धराओ को ढकना है /
मैं मचलता हुआ एक सागर हूँ ,
सारी सरिताओ को मुझमे समाना है / /

है पड़ाव डाले कितने ही कारवे ,
है ललक सब में मुझको पाने की /
सुरों को छेड़ता गीत हूँ मैं एक ,
सबको तमन्ना है मुझको गुनगुनाने की //

ज़िद है कैसी की मैं बरसू नही ,
प्यास बुझाना है मुझको कितने चातको की /
चाँद चांदनी का सिर्फ होता नही ,
आश होता है वो कितने चकवो की //

है मुरत पुजारी की जागीर नही ,
कितने थाल है आरती के लिए /
दिल लेकर ना लेना कोई मेरी जान ,
ये जाँ है माँ भारती के लिए //

One Comment

  1. Vishvnand says:

    है अंदाज़ बेमिसाल बहुत बढ़िया
    पर रचना में गल्तियों ने किया मज़ा किरकिरा
    रचना को edit कर ध्यान से सुधारिए
    फिर कमेन्ट और rating का मज़ा लीजिये

Leave a Reply