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***उधार के निशान…***

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Anthology 2013 Entries, Hindi Poetry

किसी गली के नुक्कड़ पर

लगा दीजिये 

किसी भी

प्रसिद्ध नाम का पत्थर 

वो 

उस गली की 

पहचान हो जायेगा 

वो नाम 

सबकी जान हो जायेगा

कभी गलती से

किसी ने अगर उस

पत्थर को तोड़ने की 

कोशिश भी की 

तो 

दंगाईयों का काम 

आसान हो जायेगा 

जी हाँ 

नेताओं के लिए 

चुनाव के निशान 

पुजारी के लिए 

तिलक के  निशान

उनकी जान होते  है 

ये निशान 

उनके व्यवसाय की 

पहचान होते हैं 

जाने क्योँ 

लोग वाह्य आवरण को 

अपनी पहचान बनाते हैं 

उधार के निशान से 

अपने व्यवसाय की 

मांग सजाते हैं 

भूल जाते हैं 

उन निशानों के 

मूल रचयिताओं को 

जो आज तक 

उनकी कुर्बानियों से महान हैं

तभी तो आज तक 

उन निशानों की 

जन मानस में 

अपनी विशिष्ट पहचान है 

कुर्सी का 

आसन ग्रहण करने से 

या तन पर 

वस्त्र  धारण करने से 

वाह्य पहचान तो बदल जायेगी 

लेकिन 

अगर आचरण ही न बदला तो 

तो यही  पहचान

स्वयं को धोखा दे जायेगी 

भरी महफ़िल में 

किरकिरी करायेगी 

किसी भी वस्त्र में फिर 

नग्नता न छुप पायेगी 

इक बार 

हाँ

सिर्फ इक बार

निशान में छुपी महानता के अनुरूप 

स्वयं को बदल  कर देखो 

फिर किसी उधार के निशान से 

किरकिरी न हो पायेगी 

स्वयं का आचरण ही 

स्वयं की पहचान बन जायेगी,स्वयं की पहचान बन जायेगी…….

सुशील सरना 

6 Comments

  1. siddha nath singh says:

    bahut khoob.

  2. yugal says:

    किसी महापुरुष के नाम पर मार्ग या पथ का नामकरण हमारी सामान्य प्रवित्ति है, ऐसा करके शायद हम स्वयं को धोखा ही देते है,
    महात्मा गाँधी मार्ग हर शहर में है, लेकिन दुर्भाग्य, गाँधी के मार्ग पर चलने वाला पुरे देश में एक भी नहीं. कविता हमारे आसपास ही साँस लेती है, बस दृष्टि चाहिए,

  3. Vishvnand says:

    सुन्दर रचना सच्ची बात है मार्मिक है
    नेता और राजनीतिज्ञ इसे समझे तो क्या बात है
    रस्ते का नाम दिया स्वामी विवेकानंद मार्ग है
    लोग कहते उसे S V मार्ग है, S V क्या लोगों को मालूम नही है
    और कहते हैं ये साला S V मार्ग फ़ालतू है खराब है गंदा है
    आजकल लिंक रोड अच्छा है चलो उधर से चलो 🙁

    सुन्दर वैचारिक रचना बधाई i

    • sushil sarna says:

      @Vishvnand,
      आपकी इस उत्साह वर्धक प्रतिक्रिया का हार्दिक आभार सर जी

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