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——– सत्ता सुंदरी ———–

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Hindi Poetry

कोई करता चित्त का ” चिंतन ”,कोई मन का ” मंथन ” /
सत्ता सुंदरी को पाने का ,सारा है ये जतन //
शरह्दे रौंदते दुश्मन ,
किसको है ये चिंता /
घायल हिमालय रोता ,
किसको है ये चिंता /
विष घुला है वादियों में ,
किसको है ये चिंता /
लहू से लोहित है घाटी,
किसको है ये चिंता /
चिंता है बस कुर्सी की ,कुर्सी पर है सारा ध्यान /
कोई करता चित्त का ” चिंतन ”,कोई मन का ” मंथन ” /
सत्ता सुंदरी को पाने का ,सारा है ये जतन //

प्यासी धरती प्यासे लोग ,
किया नही कोई मंथन /
अंधेरों ने सपने निगले ,
किया नही कोई मंथन /
कागजो पर बनती सड़के ,
किया नही कोई मंथन /
भ्रष्टाचार ने फन फैलाया ,
किया नही कोई मंथन /
मंथन है बस सियासत का ,कैसे बचे ये सिंहासन /
कोई करता चित्त का ” चिंतन ”,कोई मन का ” मंथन ” /
सत्ता सुंदरी को पाने का ,सारा है ये जतन //

झगडे होते मस्जिद मंदिर के ,
किसको है ये चिंता /
राज खुलते सब अन्दर के ,
किसको है ये चिंता /
जनसंख्या हो गई विकराल ,
किसको है ये चिंता /
बेरोजगारी करे सवाल ,
किसको है ये चिंता /
चिंता है पद पाने की ,पदलोलुप क्या करे मनन /
कोई करता चित्त का ” चिंतन ”,कोई मन का ” मंथन ” /
सत्ता सुंदरी को पाने का ,सारा है ये जतन //

समस्याओ से कैसे धयान बंटे ,
यही है उनका मंथन /
फिर सत्ता में कैसे डटे ,
यही है उनका मंथन /
कहा से कैसे करे धांधली ,
यही है उनका मंथन /
बंद रास्तो की ढूंढे गली ,
यही है उनका मंथन /
मंथन है जागरुक जनता का
कैसे कुचले उनका फन /
कोई करता चित्त का ” चिंतन ”,कोई मन का ” मंथन ” /
सत्ता सुंदरी को पाने का ,सारा है ये जतन //

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    वाह मनभावन प्रभावी अंदाज़े बयाँ
    अर्थपूर्ण मार्मिक रचना
    रचना के लिए हार्दिक बधाई
    मंथन सारा अपने कुर्सी पर बने रहकर लोभ, धन और वैभव बढाने की राजनीति और चिंतन
    भले देश की हो अवनति और अपने फायदे के लिए खंडन

  2. Narayan Singh Chouhan says:

    धन्यवाद विश्व्नान्दजी

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