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कभी पलके झुकते ही पूरी ज़िन्दगी गुज़र जाती है…

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Hindi Poetry

कभी पलके झुकते ही
पूरी ज़िन्दगी गुज़र जाती है…!
और कभी पलके वक़्त के गुज़रने का
इंतज़ार करते हुए झुक जाती है…!

ज़िन्दगी की दौड़ छोटी ज़रूर है,
मगर रास्ता बेहद कठिन है…!

जो लोग बीच राहो में
थक कर रुक जाते है…!
उन लोगों की ज़िन्दगी भी
वहीं से रास्ता भटक जाती है…!

और जो लोग बिना थके और बिना रुके
आगे बढ़ते रहेते है,
दुनियां भी उन्ही के कदमो में
जा कर झुक जाती है…!

कभी पलके झुकते ही
पूरी ज़िन्दगी गुज़र जाती है…!
और कभी पलके वक़्त के गुज़रने का
इंतज़ार करते हुए झुक जाती है…!

-अमित टी. शाह (Mas)
25th February 2012

4 Comments

  1. Vishvnand says:

    शब्दों की कई गल्तियाँ रचना का स्तर बहुत गिरा रही हैं
    कृपया उन्हें एडिट कर ध्यान से सुधारिए तब ही रचना पर सही कमेन्ट दिया जा सकता है

    जुकी नहीं झुकी
    कठीन नहीं कठिन
    बिच नहीं बीच
    वहिसे नहीं वहीं से …. इत्यादि

    • amit478874 says:

      @Vishvnand, त्रुटियाँ ध्यान पे लाने के लिए आप का बहुत धन्यवाद. मैंने ज़रूरी सुधार कर दिए है. आप इसी तरह हमें राह दिखाते रहे और स्नेह बनाये रखे. मै आप का और p4poetry के सभी कवि मित्रो का तह दिल से शुक्रगुजार हु. Thank you very much Sir. 🙂

  2. siddhanathsingh says:

    sahi observation hai aap ka, jo jhukte nahin unhen duniya sar jhukaati hai, jo raah me ruk jaate hain unhen baahar ka rasta dikhaati hai.

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