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“ॐ नमः शिवाय”

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Hindi Poetry

“ॐ नमः शिवाय”

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नंग वदन, गंगाधर, जटाधर, कैलाशपति, उमापति, गौरीशंकर.
नागधर, विषधर, शशिधर, भालचंद्र, नीलकंठ, महादेव,प्रलयंकर !   
नन्दीपति, महाकाल, महाभैरव, भैरवनाथ, त्रिलोकीनाथ, त्रिपुरारी,     
भस्मलसित श्मशानवासी, भूतेश्वर, भोलेनाथ, रूद्र, रिपुसंहारी !
महाविशाल होते हुए भी उनका लघुतम और सुगमतम नाम है शिव,
शव के आगे ‘इ’ की मात्रा के संयोग से पार्थिव शव बन जाता शिव !      
इसी नाम से होता है श्रेष्टतम पंचाक्षर मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का उद्भव,
जो है सर्वश्रेष्ट सरलतम मंत्र जिससे अति समृद्धिपूर्ण हो सकता है भव !
मानव को ही है ये सुविधा ऐसे महामंत्रजप का अभीष्ट महा वरदान,
प्रतिदिन इस जप को करने से उससे सर्वदा दूर ही रहता है व्यवधान !
ॐ नमः शिवाय रटते जाओ, करते जाओ, डट कर न्यूनतम १०८ बार,
सांसारिक जीवन में, वैराग्य में भी इस मंत्र से अवश्यमेव होगा उद्धार !
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2 Comments

  1. s n singh says:

    om namah shivaay.

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