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बच्चे तो आखिर बच्चे ही होते है…

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Hindi Poetry

बच्चे तो आखिर बच्चे ही होते है…

कोई किसी की मर्ज़ी से,
तो कोई किसी की गलती से आते है…!

पता नहीं क्यों…?
मगर इस दुनियां में आते ही,
बेचारे रोना शुरू कर देते है…!

न अपनी माँ को चैन से सोने देते है,
और न खुद चैन से सोते है…!

‘कौवे’ की तरह पूरा दिन रोते रहते है,
फिरभी ऐसा लगता है
जैसेकि वह मीठे ‘तोते’ है…!

कभी खेलते खेलते कही खो जाते है,
मगर फिरभी वह खुश होते है…!

आहिस्ता आहिस्ता यूंही
खो जाता है ‘बचपन’…
जब धीरे धीरे वह बड़े होते है…!

और बड़े हो जाने के बाद,
जब किसी बच्चे को
खेलते – शरारत करते देखते है,

तो फिरसे वह उन्ही बचपन की
मीठी यादों में खो जाते है…!

और कहते है,
“बच्चे तो आखिर बच्चे ही होते है…!”

– Amit T. Shah (Mas)
18th February 2012

4 Comments

  1. Vishvnand says:

    अच्छा अंदाज़, अच्छी रचना
    कहते हैं वही बड़े हमें भाते हैं
    जो childish नहीं childlike होते हैं 🙂

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