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आज तो पूरा देश जल रहा है…

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Hindi Poetry

बरसो पहले उठी थी चिंगारी जहां,
आज वहाँ पर आग बढ़ रही है…!

‘इंसानों’ की इस प्यारिसी बस्ती में,
आज कल ‘हैवानियत’ पल रही है…!

सूख गया है ‘गंगा’ का सारा पानी,
आज तो खून की नदियाँ बह रही है…!

कौन कहता है,
“आज यहाँपे इंसान जल रहा है…?
आज तो पूरी इंसानियत जल रही है…!

जीत के जश्न में डूबा हर इंसान,
आज अपनी काबिलियत भूल रहा है…!

वक़्त के साथ उगता सूरज भी,
आज तो वक़्त से पहले डूब रहा है…!

हाड-मांस का बना हुआ हर इंसान,
आज जल कर राख में बदल रहा है…!

जितना हो सके उतना जल्ली से
भाग निकलो यारो यहांसे, क्योंकी…
आज तो पूरा देश जल रहा है…!

-अमित टी. शाह (Mas)
17th February 2012

4 Comments

  1. Vishvnand says:

    रचना अच्छी है
    पर क्या सच परिस्थिति इतनी ख़राब है
    या ये ज़रा अतिशैयोक्ति है
    और जब मूड बहुत खराब था लिखी हुई है 🙂

    गलत छपे शब्द
    प्यारिसी जल्ली क्योंकी

    • amit478874 says:

      @Vishvnand, आपने बिलकुल सही फ़रमाया सरजी.. सचमे परिस्थिति इतनी ख़राब तो नहीं होगी और होनी भी नहीं चाहिए. मगर उस दिन थोडा कडवा अनुभव हो गया था इंसानियत के बारेमे, तो खुद बा खुद यह शब्द दिमाग में उबार आये..! खैर, अच्छे इंसान तो दुनिया में थे, है और रहेंगे.. और इसी कारन तो यह दुनिया आज भी जीवित है. वर्ना कब की जल कर राख हो चुकी होती…! आप की आदरणीय कमेन्ट के लिए आप का तह दिल से शुक्रिया सिरजी…! 🙂

  2. rajendra sharma'vivek' says:

    Desh .samaaj ke baare me achchi rachanaa

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