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अगर…

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Hindi Poetry

अगर साँसे न होती, तो आज
यह ज़िन्दगी न होती…

अगर ज़िन्दगी न होती, तो आज
उनसे मुलाक़ात न होती…

अगर मुलाकात न होती, तो आज
उसे पाने की ख्वाहिशें न होती…

अगर ख्वाहिशें न होती, तो आज
इस दिल में धड़कने न होती…

और अगर धड़कने ही न होती, तो आज
इस दिल पर उसकी ‘हूकुमत’ न होती…

– अमित टी. शाह (Mas)
17th February, 2012

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    अच्छी रचना
    मन भायी
    और अगर दिल पर उसकी हुकूमत न होती तो ?
    आज यह “अगर” भी सोचने की बात है ….
    शायद कोई नयी रचना लिखने की बात है 🙂

    • amit478874 says:

      @Vishvnand, ज़रूर लिखेंगे सरजी… आप का आशीर्वाद बनाये रखे…! होंशला अफझाही के लिए धन्यवाद…! 🙂

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