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— रहा प्यार से ना वास्ता—-

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Hindi Poetry

तलाशती निगाहों की बंद हुई दास्ताँ /
मिट गई मोहबत्त ,रहा प्यार से ना वास्ता /

निश्छल मन की भावनाये ,इतनी थी गहरी /
थाह ना ले पाई कोई हँसी बावरी /
प्रीत को समझ के खेल ,मीत से वो खेल गई /
छलिया बन कर भोले मन को कोई हटी छल गई /
बदल गई मंजिल ,बदल गया है रास्ता /
मिट गई मोहबत्त ,रहा प्यार से ना वास्ता /

अपनापन रहा नही सम्बन्ध सारे टूट गए /
डोलिया कहार ही आज फिर लुट गए /
सहेज ना सकी कोई ,छलकता स्नेह /
प्यार को बना ना पाई कोई अपना धेय/
हेय दर्ष्टि से देख प्यार कर गई सस्ता /
मिट गई मोहबत्त ,रहा प्यार से ना वास्ता /

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    खूबसूरत रचना खूबसूरत अंदाज़ हार्दिक बधाई
    प्रवाह में इसे पढ़ते पढ़ते न जाने क्यूँ नीरज जी के गीत की वो सुन्दर पंक्तिया याद आ गयीं
    “कारवाँ गुजर गया गुबार देखते रहे “

    • Narayan Singh Chouhan says:

      @Vishvnand,

      बहुत बहुत धन्यवाद विश्वन्दजी ………कहा नीरजजी साहित्य के समन्दर और में कहा गागर की बूंद

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