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वो एक अंधेरी रात थी

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Hindi Poetry, Jan 2012 Contest

वो एक अंधेरी रात थी

वो एक अंधेरी रात थी,   प्यार भरी  मुलाकात थी.

चाँद और धरती का मेल था, क्या ग़ज़ब ये खेल था

चाँद था वो ईद का ,चिलमन से था जो दिख रहा.

धरती बेकरार थी, चाँद से मिलने जा रही.

नज़रें जो टकरा गईं, दिलों में प्यार जगा गईं.

छाया  ऐसा जोश था,  दोनों को न होश था.

बेखुदी का आलम था, बरस रहा सिर्फ प्यार था.

कुछ वक्त वो साथ-साथ रहे,  फिर चलने अपनी राह लगे.

दोनों ही मदमस्त हुए, चाल मतवाली चलने लगे.

चाँद तो मध्होष था, धरती पे छाया नूर था.

जज़्बातों की वो रात थी, क्या अजब ये बात थी.

वो एक अंधेरी रात थी, प्यार भरी मुलाकात थी.

Jaspal Kaur

5 Comments

  1. Reetesh Sabr says:

    चित्रण मनोहारी!

  2. shakeel says:

    बहुत खूब लिखा है आपने.

  3. Vishvnand says:

    Nice poem
    A dark night starred with meeting & love thoughts
    Liked much

  4. rajivsrivastava says:

    Bahut khoob !badahai

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