« »

Happy New Year

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

” नए साल का गीत”
सुधा गोयल “नवीन”

न कुछ बदला है, न बदलेगा,
हम हर साल ख़ुशी मनाते थे, इस साल भी मनाएंगे

बस कील पर टंगा कैलेण्डर उतर जाएगा
जगह बना देगा दूसरे नए कैलेण्डर की………
शेष जो जहां था वहीँ अटका रहेगा …
हम मुस्कुराएंगे, गुनगुनायेंगे और नाचेंगे भी…..

ख्वाहिशों के पखेरू पंख फड़फडाएंगे
हसरतों के क्षितिज छूने को छटपटांएंगे ….
हक़ के वास्ते कोहराम मचाएंगे
बहुत हुआ तो कोई अन्ना या रामदेव अन्न त्याग जायेंगे ……..

न कुछ बदला है, न बदलेगा,
हम हर साल ख़ुशी मनाते थे, इस साल भी मनाएंगे

बड़े बुजुर्गों की बहशियत व् नादानी पर
बच्चे कुलबुलाएंगे
रेल बंद, बाजार बंद, अस्पताल बंद की त्रासदी पर
भरसक खिसियाएंगे ………
कुछ करने के नाम पर काले सफ़ेद झंडे लहरायेंगे…….

“उम्मीद पर दुनिया जीती है”..
“काली रात के बाद सबेरा होता है”…
“अच्छाई बुराई सिक्के के दो पहलू हैं”…
“वर्तमान कब ठहरा है जो अब ठहरेगा”
बीत जाएगा….कह ….कहकर,
हम धूमधाम से नया साल मनाएंगे….

न कुछ बदला है, न बदलेगा,
हम हर साल ख़ुशी मनाते थे, इस साल भी मनाएंगे

शर्म, शर्मसार होगी..तो क्या…
अस्मिता नीलाम होगी तो क्या….
मुन्नी बदनाम होगी तो क्या……
घोटालों पर घोटाले करने से हम,
न आजिज आए थे न आयेंगे ………

न कुछ बदला है, न बदलेगा,
हम हर साल ख़ुशी मनाते थे, इस साल भी मनाएंगे
+++++++++++++++++++++++++++++++++

10 Comments

  1. Sunil says:

    बहुत खूब

  2. siddhanathsingh says:

    ise kahte hain kahan ka dhaardaar andaaz, bahut khoob.

  3. Vishvnand says:

    सुन्दर बढ़िया वैचारिक रचना
    बहुत मन भायी

    कुछ अच्छा न बदले और कुछ बुरा जरूर बदले इस आशा में
    हर नव वर्ष खुशी से मनाते हुए हम केलेंडर नया बदलते जायेंगे ….

    • sudha goel says:

      @Vishvnand,
      विश्वनंद जी आपकी प्रतिक्रया का हमेशा इंतज़ार रहता है.
      धन्यवाद!

  4. yugal gajendra says:

    “शर्म, शर्मसार होगी..तो क्या…
    अस्मिता नीलाम होगी तो क्या”….
    जो बीत गया,उसे याद करती, कुछ सपने बुनती, आशा और निराशा के द्वन्द में उलझी, नए सूरज का स्वागत करती,संवेदनाओ के धागों से बुनी हुई कविता. बस

  5. Tisha says:

    Your answer was just what I needde. It’s made my day!

  6. Manju Agrawal says:

    what an excellent poem on new year. sudha ji ko bahut bahut sadhuvad.
    Modi has give a new hope and i am sure your next new year peom will be
    “bahut kuch badala hai va bahut kuch badlega”

Leave a Reply