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एपेटाईट

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Hindi Poetry

मैं ग़रीब हूँ
मेरी एपेटाईट बहुत कम है.

छोटी सी ख़ुशी से खुश हो लेता हूँ
छोटी सी बात पे भी रो लेता हूँ
जहाँ होता हूँ, सो लेता हूँ.
चुग लेता हूँ कुछ भी, कहीं भी
मर सकता हूँ, अब भी, यहीं भी
कयोंकि सपनों की लीज़ अब ख़तम है.

खुशहाली के चमत्कार से वास्ता नहीं
गिरते बाज़ार से वास्ता नहीं
तीज ओ त्यौहार से वास्ता नहीं.
समाजी पैमाने पे निरर्थक हूँ
स्वार्थी बने रहने का समर्थक हूँ .
सर उठाये रखने तक कंधे में दम है
आँखों में शरम है
गुस्सा थोडा ज्यादा है
पर एपेटाईट बहुत कम है.

5 Comments

  1. Nishant Khare says:

    but appetite to write better than before is always more than ever…

  2. Nishant Khare says:

    but appetite to write better than before is always more than ever…nice….

  3. Ashant says:

    What a beautifully expressed feelings of hungry man.

  4. Vishvnand says:

    बहुत ही सुन्दर प्रशंसनीय रचना अलग सी ह्रदयस्पर्शी of profound thoughts
    आपकी इस “कम एपेटाईट” ने हमारी आपको पढ़ने की बढ़ा दी है बहुत एपेटाईट
    इस प्रभावी रचना के लिए हार्दिक बधाई और धन्यवाद जैसे किया हमें enlight
    कृपया अब बार बार यूं यहाँ ऐसे आइये, न भूलिए हमारी अब जगी हुई अपेताईट

  5. pooja says:

    विकाश जी, क्या बात है… बहुत ही अच्छी रचना है… बस और ज्यादा बोलना उचित नहीं…

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