« »

प्याले पे प्याले पी के भी, दिल में वही कमी…!

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

प्याले पे प्याले पी के भी, दिल में वही कमी…!

प्याले पे प्याले पी के भी, दिल में वही कमी,
पीकर के प्यास बुझ सके, वो प्यास ये नहीं………. !

किरकेटरों को हमने  है हीरो बना दिया
सीमाओं पर जवान क्या हीरो बड़े नहीं
पीकर के प्यास बुझ सके, वो प्यास ये नहीं………. !

देश के हीरो हैं जो खेतों को  कस  रहे,
क्यूँ खुदकुशी से उनको बचाया गया नहीं……
पीकर के प्यास बुझ सके, वो प्यास ये नहीं………..!

इतनी हुई बारिश, की कई घर उजड़ गए,
कितने घरों मे पीने को पानी भी अब नहीं,
पीकर के प्यास बुझ सके, वो प्यास ये नहीं…………!

नेता जो हमको कितना कुछ करने को कह रहे,
कुछ ख़ुद ही करके हमको क्यूँ  दिखाते  ये नहीं.
पीकर के प्यास बुझ सके, वो प्यास ये नहीं………. !

पैसे ने पीछे अपने सबको भगा लिया,
सुख छोड़ हमको चल दिया  हमको ख़बर नहीं,
पीकर के प्यास बुझ सके, वो प्यास ये नहीं…………!

गाडी बड़ी है, घर बड़ा, है पास सब बड़ा,
नींद उड़ गयी है कर्ज में बतलायें क्यूँ नहीं,
पीकर के प्यास बुझ सके, वो प्यास ये नहीं………..!

मंत्री कहें इनने किया सब  देश की खातिर
किसके लिए किया है क्या हम  देखते नहीं

पीकर के प्यास बुझ सके, वो प्यास ये नहीं…………!

जीता चुनाव पैसों से अब बन गए अमीर
लूटा है देश को क्या ये सब जानते नहीं
पीकर के प्यास बुझ सके, वो प्यास ये नहीं…………!

आया चुनाव  कर रहे वादे  बड़े बड़े
रिश्वत के  केन्सर  से ये बचेंगे अब नहीं
पीकर के प्यास बुझ सके, वो प्यास ये नहीं…………!

लायेंगे लोकपाल को वादे ये कर रहे
इनके ये झूट का हम सच क्या जानते नहीं
पीकर के प्यास बुझ सके, वो प्यास ये नहीं…………!

इनको सबक सिखाने की ही प्यास ये बड़ी
जब तक न होगी जीत हम रुकेंगे अब नहीं
पीकर के प्यास बुझ सके, वो प्यास ये नहीं………. !

“विश्वनंद”

10 Comments

  1. ashwini kumar goswami says:

    अत्यंत गहन भवनात्म्जत्मक रचना के लिए हार्दिक बधाई ! बहुत खूब !!!

    • Vishvnand says:

      @ashwini kumar goswami
      आपकी यह प्यारी प्रतिक्रिया मेरा प्रयास सार्थक और मन हर्षित कर गयी …
      आपका तहे दिल से शुक्रिया …..

  2. सहज सरल स्व स्फूर्त रची गई यह रचना अच्छी लगी

  3. sakhi says:

    अच्छी बाते उठाई है …अच्चा लगा आपका लिखा पुनः पढ़ना

  4. rajivsrivastava says:

    samaj ko aaina dikhaya hai! HUm sab ko ye pata hai–aur kya hona chahiye ye bhi pata hai–phir hum aage kyo nahi badhte.Hame is samaj ko badalna hoga! kyo ki hum bhi kahi na kahi is ke jimmedaar hain—prerna mahi “Ek ati uttam rachan”–badahai sir—kuch nije karno se abhi sakriye nahi ho pa raha hun–jald hi wapas aaoonga.Apna aasish banaye rahiyega sir.Aap hi hamare prerna shrot hai.

    • Vishvnand says:

      @rajivsrivastava
      pratikriyaa ke liye dhanyvaad aur aapke muh me shakkar
      Ham aapko miss karate hain par Mujhe maaloom hai jab jab samay milaagaa aapme passion for poetry aapko p4poetry par jaroor khiichatii le aatii rahegii.. Ham aapke bas swasthataa kii duaa karte rahenge.

  5. Sushil Joshi says:

    देश के हीरो हैं जो खेतों को कस रहे,
    क्यूँ खुदकुशी से उनको बचाया गया नहीं……
    पीकर के प्यास बुझ सके, वो प्यास ये नहीं……… वाह…..

    बहुत खूबसूरत एवं सच्चाई को व्यक्त करती हुई इस रचना के लिए बहुत बहुत बधाई विश्वानंद जी……

    • Vishvnand says:

      @Sushil Joshi
      आपकी ये प्रोत्साहनपर प्रतिक्रिया बहुत खुशी दे गयी
      आपको हार्दिक धन्यवाद

Leave a Reply