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सपनों का संसार

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Dec 2011 Contest

सपना अपना रह नहीं पाया
व्यथा ह्रदय की कह नहीं पाया

कुछ यादे सपनों में बसती
आशाओं की बहती कश्ती
मन की आशाओं का पंछी
सपनों के भीतर उड़ पाया

सपनो का अपना आकर्षण
निज इच्छा का होता दर्पण
दर्पण के भीतर रह -रह कर
सपनो का साया मुस्काया

निर्धन का सुख सपनों में है
ह्रदय का सुख अपनों में है
अपनों से अपनापन पाकर
जीवन का सारा सुख पाया

सपनो का श्रृंगार करे हम
हर सपना घावो का मलहम
सपनों का संसार सजाकर ,
यह मन पीड़ा को हर पाया

24 Comments

  1. Vishvnand says:

    सुन्दर कविता सपनों पर ये
    सपनों जैसी मनभावन ये
    Commends

    “अपनों से अपनापन पाकर” की जगह “सपनों से अपनापन पाकर” शायद कविता के विषय की दृष्टी से ज्यादा उपयुक्त हो…

  2. Narayan Singh Chouhan says:

    अच्छी रचना …………

    सपनो पर न जोर किसी का /
    सपनों का न छोर कही का /
    अब सुकोमल नींद कहा है ,
    रहा न सपनों का दोर कही का //

  3. parminder says:

    सपने न हों तो जीवन नीरस हो जाए! कुछ आशाएं तो हमें सपने में ही पूरी करनी होती हैं! सुन्दर अभिव्यक्ति!

  4. Aditya ! says:

    सुन्दर कृति के लिए बधाई. लिखते रहिये.

  5. sonal goswami says:

    nice..:)

  6. sonal says:

    निर्धन का सुख सपनों में है
    ह्रदय का सुख अपनों में है
    अपनों से अपनापन पाकर
    जीवन का सारा सुख पाया

    सुन्दर कृति !

  7. medhini says:

    Hearty congratulations, the winner,Vivek.

  8. Hi
    सपनो का साया मुस्काया
    Congratulations
    beautiful lines—-दर्पण के भीतर रह -रह कर
    सपनो का साया मुस्काया
    keep it up!
    sarala

  9. sushil sarna says:

    Congratulations, in fact the poem is real essence of dreams. So once again many many congratulations being declared as winner.

  10. renu rakheja says:

    Congratulations for winning the December contest.Please advise your email id so that we can mail you

  11. kshipra786 says:

    सुन्दर रचना सर | जीत की बधाई |

  12. Reetesh Sabr says:

    विजयी रचना के रचयिता को विजय की बधाई!

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