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टारगेट….!

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Anthology 2013 Entries, Hindi Poetry

टारगेट….!

………….

 

 

बेटे,

कहीं हुआ क्या ?

अरे होगा कैसे?

कभी मेहनत करता तो होता ना !

इसका कोई कोई एम ही नहीं है,

कोई टारगेट ही नहीं है.

 

अब बस करो  यार !

बहुत टॉर्चर किया है तुम सबने,

बहुत बेईज्ज़त हो चुका हूँ  मैं,

मैंने टारगेट बना लिया है,

अब मेरा टारगेट है-

तू ..तू  और तू भी.

 

नसीहत अपने रंग में आ चुकी थी.

 

 

*** हरीश चन्द्र लोहुमी

10 Comments

  1. Vishvnand says:

    भाई वाह, बढ़िया अलग सी रचना और up to date
    पर समझ नहीं आ रहा
    पहले outdated फिर target
    क्या आप इन up to date रचनाओं से
    करना चाहते outdated को target …..? 🙂

    • Harish Chandra Lohumi says:

      @Vishvnand, हार्दिक आभार और धन्यवाद सर ! आपकी प्रतिक्रिया हमेशा रचना पर भारी पड़ती है. अब और भी असमंजस हो गया है कि कौन है old कौन है outdated और कौन है updated 🙂

  2. Bhanu says:

    Nice lines…

  3. s.n.singh says:

    चलो जी टार्गेट तो बन गए अब एम का क्या करें,वह भी तो चाहिए होगा वर्ना टार्गेट तो मुंह चिधायेंगे और तीर निशाने से अलग ही जायेंगे.

    • Harish Chandra Lohumi says:

      @s.n.singh, यह सब पता होता तो पप्पू का कहीं हो नहीं जाता सर ! 🙂
      हार्दिक धन्यवाद और आभार आपने बात रखी तो .

  4. Rajeev says:

    अच्छी सोंच !!! कुछ लोगों के लिए नशिहत !!!!

  5. Hullo
    Great Lines …. in aimless times.
    sarala

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