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आ उ ट डे टे ड / O U T D A T E D

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Hindi Poetry

आ उ ट डे टे ड / O U T D A T E D
…………………………………..

अब मैं लगने लगी हूँ ना तुम्हें,
आउटडेटेड !
एक पुराने डेस्कटॉप पीसी की तरह .
अब मैं  दे भी कहाँ  पाती हूँ,
परफोर्मेंस,
तुम्हारी  मनमाफिक ।

मैं जानती हूँ ,
तुम्हें भायी है कोई,
नयी नवेली,
लैपटॉप सी,
जिसे तुम जब चाहो,
ले जा सकते हो,
अपने साथ,
बिठा सकते हो,
अपनी गोद में  ,
पूरा  इन्जौय भी कर सकते हो ।

लेकिन देखना !
वो दिन भी जरूर आयेगा,
जब तुम निकालना चाहोगे,
अपने दिल की भडा़स,
और जोर जोर से मारना चाहोगे,
अपनी  उँगलियों को,
उस लैपटॉप के “की-पैड” पर,
पर नहीं मार पाओगे,
वह कहाँ सह पायेगा,
वार पर वार ।
वह खराब नहीं हो जायेगा ?

उस दिन तुमको,
जरूर याद आयेगा,
आउटडेटेड डेस्कटॉप पीसी का,
वह “की-बोर्ड” ,
जो तुम्हारे सारे वार सहन कर,
हमेशा खुश सा रहता था,
मेरी तरह ।

*** हरीश चन्द्र लोहुमी

6 Comments

  1. rajendra sharma 'vivek' says:

    हरीश जी
    कविता मर्म भाया की पुराना व्यक्ति वस्तु या कृति वह ज्यादा मजबूत होती है
    क्योकि नहीं पड़ता उसमे आधुनिक कृत्रिमता का साया

  2. Vishvnand says:

    वाह वाह क्या बढ़िया सी रचना और आपका अंदाज़े बयाँ
    कुछ भी कहिये हम पुराने हैं और पुराना ही सच में होता है पूर्ण अपना
    देखा न जाता अपने लैपटॉप का और किसी ने भी अपने लैप पर रखना

    Hearty commends for the elegant poem

    • Harish Chandra Lohumi says:

      @Vishvnand, रचना और अंदाज़े बयाँ की तारीफ़ का शुक्रिया सर ! आशीर्वाद बनाए रखें.

  3. lokendra Singh says:

    old is gold hai na harish ji,

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