« »

“कसाब” खुद ही फांसी चढ़ जायेगा……………..

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

“कसाब” खुद ही फांसी चढ़ जायेगा…………….. 

 

खून खौलता है याद कर 26/11

मंजर याद आते ही चढ़ जाता है पारा 

खुले आम उसने खून की होली खेली 

फांसी नहीं चढ़ा पाया उसे कानून हमारा 

 

बहुत आसान तरीका हम बताते है 

‘कसाब’ को विदर्भ का किसान बनाते है 

जेल का ऐसो आराम उसे यहाँ नहीं मिलेगा 

सजा नहीं दे पाया इसलिए देश नहीं जलेगा 

 

अपने कर्मो पर कसाब खूब पछतायेगा 

हर पल उसे जेल का सुकून याद आएगा 

विदर्भ का “किसान” होना ही गुनाह है 

शर्त है अपनी “कसाब” खुद ही फांसी चढ़ जायेगा…………….. 

 

10 Comments

  1. vikram says:

    Bhai shab aap ne bilkul sahi kaha ….i agree with u.

  2. Vishvnand says:

    भई क्या बात है
    इस गंभीर विषय पर अति सुन्दर बहुत प्रशंसनीय रचना
    इसके लिए हमारा वंदन और हार्दिक अभिवादन स्वीकारना

    बहुत प्रभावी मार्मिक है ये अंदाज़ ए बयाँ
    जैसे जोर का तमाचा लगाया हो लगाना था जहाँ
    नहीं सुधरेगे ये सब अहिंसा के कैदी
    जब तक न हिंसा हो और हो बर्बादी
    ये कैसी है शिक्षा इन आतंकियों को
    ये तो शिक्षा कड़ी है देशवासिओं को

  3. Harish Chandra Lohumi says:

    जबरदस्त प्रहार !

  4. rajdeep bhattacharya says:

    Its true
    Very nice

  5. suresh dangi says:

    ह्रदय को छू गयी . बधाई स्वीकार करें .

Leave a Reply


Fatal error: Exception thrown without a stack frame in Unknown on line 0