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यह शहर बड़ा धोखेबाज़ है…

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Hindi Poetry

संभल कर चलना दोस्त,
यह शहर बड़ा धोखेबाज़ है…!

हर मौसम का यहांपे,
एक अनोखा आगाज़ है…!

अपने कायर होने का भी,
यहांपे लोगों को नाज़ है…!

अश्कों की गहेराइयों में छिपे,
हर एक के कई राज़ है…!

साथ चल कर भी आगे रहेना,
यहांपे लोगों का अंदाज़ है…!

संभल कर चलना दोस्त,
यह शहर बड़ा धोखेबाज़ है…!

-Amit T. Shah (MAS)
24th November 2011

6 Comments

  1. amit478874 says:

    I’m feeling happy to introduce my blogs to my 94p friends. Thank you all for such a great support up till…! 🙂
    http://poemsofmas.blogspot.com/

  2. Vishvnand says:

    वाह, बहुत बढ़िया कही बात है
    पर खुद अपनी जिन्दगी का सच पहचानना
    इन सारे धोखे और बाजियों का इलाज़ है
    चाहे किसी शहर में हो या किसीका भी राज है

  3. Harish Chandra Lohumi says:

    साथ चल कर भी आगे रहेना,
    यहांपे लोगों का अंदाज़ है…!
    वाह अमित जी ! छू गयीं ये पंक्तियाँ 🙂

  4. siddhanathsingh says:

    simple yet meaningful/

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