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कौन बुरा था कौन भला ?

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Hindi Poetry

जब जब भी तुम कहते थे और हम चुप चुप से रहते थे
और इतना इतना हँसते थे कि आँख से आंसू बहते थे.
जब तेरी मेरी आँखों में, बस एक से सपने पलते थे
हम अपनी धुन में जीते थे और जलने वाले जलते थे.

उन लम्हों की यादों से जो एक बूँद आंसू निकला
तब हम तुमसे पूछेंगे कि कौन बुरा था कौन भला.

झील किनारे, खिले सितारे, टुक टुक बैठे तुम्हे निहारे
आँखों ही आँखों में खेलें, हम तुम कितने खेल न्यारे.
मैं जीतूँ तब भी तुम जीतो, तुम जीतो तब भी हम हारे
जीत तुम्हारी, खेल तुम्हारा, मैं भी तेरा साथ तुम्हारे.

उन शामों का सूरज, तेरी नजरों में जो कभी ढला
तब हम तुमसे पूछेंगे कि कौन बुरा था कौन भला.

5 Comments

  1. Vishvnand says:

    अतिसुन्दर ये प्यारी रचना बहुत बहुत मन भायी है
    कौन बुरा था कौन भला; प्रश्न ये कैसा आया है
    नियति प्यार का खेल रचाती उसका ही बोलबाला है

  2. Harish Chandra Lohumi says:

    प्रसंशा में क्या लिखूं, सूझ नहीं रहा.

  3. rajendra sharma 'vivek' says:

    अच्छी अभिव्यक्ति ,
    रचना में अत्यंत गहराई से भावनाए पिरोई गई है

  4. Pratap Narayan Singh says:

    भाई विकास ! कविता अच्छी लगी.
    बधाई हो !

  5. siddhanathsingh says:

    मैं जीतूँ तब भी तुम जीतो, तुम जीतो तब भी हम हारे
    ise kaise sahi kahen.ja unki jeet hamari jeet hai to ham haar kaise sakte hain?

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