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तुम तो बच निकले मगर, बारी हमारी आ गयी

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Hindi Poetry

तुम तो बच निकले मगर, बारी हमारी आ गयी


तुम तो बच निकले मगर, बारी हमारी आ गयी,

अब  हमारे  पास ही, गर्दन के आरी आ गयी ।

 

हममें भी जज़्बा था हम भी बच निकलते वार से,

बेबसी थी, सामने आँखें तुम्हारी आ गयी ।

 

वाह रे तेरी मोहब्बत वह तमाशा वाह रे,

मेरा बन जाना, गज़ब सा तेरी यारी ढा गयी ।

 

आ गया है  आज मौका  पास से देखेंगे हम,

दर्द को नज़दीक से चखने की बारी आ गयी ।

 

अब तो होनी है कयामत चन्द लमहों बाद ही,

वारदाते इश्क में हमको खुमारी छा गयी ।

 

लग रहा है इश्क़ का यह देवता पैदल हुआ,

इसका अब कोई नहीं हम पर सवारी आ गयी ।

 

 

***** हरीश चन्द्र लोहुमी

12 Comments

  1. Vishvnand says:

    तुमने तो रचना लिख शेयर कर डाली अब कमेन्ट की बारी हमारी आ गयी
    बहुत ही प्रशंसनीय मनभावन मीठी लगी रचना; ये उत्स्फूर्त प्रतिक्रिया अपनेआप निकल आयी
    क्या बात है; हर शेर जो पढ़े उनकी हर बात ही लगी अलग निराली और मतवाली
    हार्दिक अभिनन्दन और बधाई

  2. siddha Nath Singh says:

    bahut khoob,

  3. kishan says:

    बहुत खूब .मनको भाई
    ऐसी खुबसूरत रचना आई

    • Harish Chandra Lohumi says:

      @kishan, रचना ने तारीफ़ पायी…पुरस्कार सा मिला. हार्दिक आभार .

  4. amit478874 says:

    पढ़ कर आप की इस रचना को,
    होठों पे हंसी हमारी आ गयी…!
    बहुत बढ़िया….! 🙂

  5. Rajeev says:

    Koi baat nahin Harish bhai……. saab ki baari aayegi!!!

  6. Reetesh Sabr says:

    एक से बढ़ के एक काफ़िये एक से बढ़ के एक ख़याल…मोहब्बत में फना होने की तैयारी आ गयी;)

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