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kash ki hota sab waisa

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Hindi Poetry

काश कि होता सब वैसा

काश कि वो दिन कभी लौट कर आते
बहाने से सही  उनका  साथ तो हम पा पाते
उनको हमारा और हमें  उनका  ख्याल तो होता
काश कि वो वक़्त रुक जाता वहीं
उनकीं  बातें लगी, दिल को छूने
हर बात उनकी क्यों लगती सही
मन करता बैठी रहूँ यूँ  ही करीब उनके
फूलों की तरह वो सुंदर, मोर- सा मनमोहक
खिंचने लगी मैं उसकी  ओर
वो महफिलों को खुशनुमा बनाता
हमने उसे  मार्गदर्शक भी चुना
तरसती थी आँखें दीदार को उनके
घंटों उन हसीं लम्हों का इंतज़ार होता
काश कि वक़्त को, मैं रोक पाती

जुदा हुई जब उनसे अचानक
रोता था यह छोटा-सा दिल
हर वक़्त उनके खयालों में डूबा रहता
मन मेरा तब  पराया होने लगा
मिलने  के उनसे बहाने तलाशने लगा
महफिलों में होकर भी तन्हा सी हो गयी

काश कि वो लम्हे, बापस लौट कर आये
काश कि ये, मेरे बस में होता
काश कि वक़्त को, मैं रोक पाती

काश कि कोई लम्हा वो भी याद करे हमें
काश कि मेरा इंतज़ार कुछ तो कम होता
काश कि पहले की ही तरह, मुसकुरा  पाती मैं दोबारा
काश कि उन लम्हों को मैं ज़िन्दगी बना पाती
काश कि कुछ तो मेरे बस में होता
काश कि भुला पाऊं मैं उनको
काश कि कोशिश ये सफल हो
खुदा इसे तो मेरे बस में करना
काश कि होता सब वैसा जैसा चाहता है  इंसान
काश कि होता सब वैसा

3 Comments

  1. Vishvnand says:

    भावनाओं, कल्पनाओं और मन की दुविधा और चाह का सुन्दर विवरण है
    पर रचना में और सुन्दरता और कवित्व विदित होने rhyme, Rhythm aur flow की दृष्टी से refinement और सुधार की जरूरत महसूस हो रही है . इसकी ओर कृपया ध्यान दीजिए तो बहुत बढ़िया,

  2. Ajay1919 says:

    Lagta hai kahi dil haar baithe hai aap. Rachana mai ek angarh sacchai jhalak rahi hai, aisi rachana dil se seedhe kagaj par utarti hai. Bahut sundar hai. Koi sudhar mat kariyega, nahi to iska angarh pan khatm ho jayega… God bless you..

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