« »

संगीत से ———

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry, Oct-Nov 2011 Contest

 

अमवा के पेड़ पे बैठी कोयल कारी कारी ,

कूह-कूह के बोल सुनाये,डोले डारी डारी !

सुन कर उसकी धुन,दो पल बादल भी रुक जाते हैं ,

झूम झूम कर नाच दिखाये, उसके आगे झूक जाते हैं !

बच्चे सरपट छोड़ के बल्ला,लपके उसकी ओर ,

नकल उतारे,उसे चिडाये ,खूब मचाये शोर !

अबोध मन ने किया प्रश्‍न,माँ ये कोयल क्यो नाम कमाये ,

ना रंग ,ना रूप है इसका फिर ये क्यो सब मन भाये !

बोली माँ ,प्रभु ने कोयल को बनाया काला ,

पर इसको वरदान दिया इसके कंठ अमृत स्वर डाला !

देकर इतने प्यारे स्वर कोयल को, प्रभु हमे बतलाते है ,

जो मधुर वाणी बोले वो अवश्य ही नाम कमाते है !

जिसने भी संगीत से अपनी वाणी को सींचा है ,

दिल मे जगह बनाई उसने ,और सब का मन जीता है !

संगीत ना देखे ऊँच – नीच ,ना देखे कोई जात-पात ,

जो भी करे साधना इसकी,उसे मिल जाती ये सौगात !

 डॉक्टर राजीव श्रीवास्तवा



3 Comments

  1. Vishvnand says:

    सुन्दर कल्पना और उसपर रची रचना
    बहुत मन भायी यह संगीत के प्रति भावना
    हार्दिक बधाई

    कूह-कूह = कुहू कुहू ; झूक = झुक

  2. N.S. Chouhan says:

    सही है …………….

  3. kalawati says:

    जिसने भी संगीत से अपनी वाणी को सींचा है ,
    दिल मे जगह बनाई उसने ,और सब का मन जीता है !
    संगीत ना देखे ऊँच – नीच ,ना देखे कोई जात-पात ,
    जो भी करे साधना इसकी,उसे मिल जाती ये सौगात !
    क्या बात है.

Leave a Reply