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‘ मेरा बचपन ‘

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Hindi Poetry
      ‘ मेरा बचपन ‘
 
पापा की गोदी में 
अठखेली करता वो बचपन ,
माँ के आँचल में 
छुपता-इठलाता वो बचपन ,
आँखों में शरारत, ग़मों से अनजान ,
हँसता-मुस्कुराता वो बचपन , 
काश कोई लौटा दे ,
वो प्यारा-सा मेरा बचपन !
 
– सोनल पंवार

3 Comments

  1. Vishvnand says:

    रचना सुन्दर और संक्षिप्त
    मन भायी बहुत ….
    लिखते रहिये

  2. Manoj says:

    Dear I read your poem,
    Very nice
    बहुत सुन्दर
    लिखते रहिये

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