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‘ संगीत है…….’

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Hindi Poetry
               ‘ संगीत है…….’
 
संगीत है सात सुरों की सरगम ,
सा रे ग म प ध नि का संगम !
सागर की लहरों से उठता है संगीत ,
रेतीली हवाओं की सरसराहट में है संगीत ,
मों के काँटों में फूलों-सा कोमल अहसास है संगीत ,
न के अनगिनत तारों को झंकृत करता है संगीत ,
नघट की गागर के छलकते जल में है संगीत ,
रती पर थिरकते क़दमों की आहट में है संगीत ,
निशा में विचरते पक्षियों के कलरव में है संगीत !
संगीत है बना सात सुरों की इस सरगम से ,
संगीत है बसा प्रकृति के हर कण-कण में ,
संगीत  से मिलता है हर दिल को सुकून ,
सभी के जीवन में रचा-बसा है संगीत !
 
– सोनल पंवार
 
( For Oct 2011 Contest )
 

2 Comments

  1. kalawati says:

    पनघट की गागर के छलकते जल में है संगीत ,
    धरती पर थिरकते क़दमों की आहट में है संगीत
    बहुत सुन्दर सोनल जी.

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