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तिमिर सामाज्य चीरकर ,नव चेतना जागे

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Hindi Poetry

कमजोर सूत्रों पर टिके है, रिश्तो के धागे
अनगिनत कठिनाईया ,इन्सान के आगे
खोखले विश्वासो पर कटती यहाँ पर जिन्दगी
उनकी यादो मे न सोये,रात भर जागे

कच्चे है घर के घरौंदे ,सुख-चैन को त्यागे
दर्द दुख परेशानियो को ,छोडो बढो आगे
जब हौसले हो इस दिल मे ,और सामने हो मंजिले
तिमिर सामाज्य चीरकर,नव चेतना जागे

छल कपट व्यवहार से हम ,कब तलक भागे
प्रीती के अनमोल बोल,मन मीत मे लागे
हर तरफ घनघोर तम है,उलझने है और गम है
ऐ जिन्दगी संघर्ष कर तू! अब जीत है आगे

7 Comments

  1. Vishvnand says:

    सुन्दर मनभावन अभिव्यक्ति
    ऐसी ही अपने attitude(अभिवृत्ति) में लाना है असली शक्ति

  2. Narayan Singh Chouhan says:

    बहुत अच्छी रचना ……….

  3. siddha Nath Singh says:

    aashavadi svar, kahavat yaad aayi- an optimist laughs to forget and a pessimist forgets to laugh.

  4. siddha Nath Singh says:

    कविता में वर्तनीगत अशुद्धियाँ उचित नहीं हैं , चिर कर ko चीरकर होना चाहिए , सुत्रों ko सूत्रों होना चाहिए . जब पाठ्यक्रम में रखने की बात हो रही हो तो व्याकरण और वर्तनी महत्वपूर्ण हो जाते हैं .

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