« »

वरना जोगन बन डोलूँगी …..

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry, Sep 2011 Contest

वरना जोगन बन डोलूँगी …..

 

जी भर बरसे मेघा फ़िर भी, पपिहन प्यासी हूँ बोले,

शब्द प्यास के फ़िर वह रह रह सबके कानों में घोले ।

 

लगता है कुछ शेष रह गयी अन्तर्मन की टीस सखे !

जी भर नाचा खूब मयूरा, फ़िर अधीर है पर खोले,

 

हरियाली का ताज सजा था कल बारिश की रिमझिम में,

कुम्हिलाने फ़िर लगी धरा है, शनै: शनै: हौले हौले ।

 

घर आँगन जलमग्न हुए थे, झरने भी थे खूब बहे,

पर यह कैसी प्यास सखे ! जो खड़ी ओखली मुँह खोले ।

 

अब तुम ही बतला दो कैसे, एक स्पर्श से जी लूँ मैं,

तुम मुझसे कहते हो भर लूँ , एक बार में ही झोले ।

 

मन की पीड़ा समझ सको तो,  मिलना बारम्बार सखे !

वरना जोगन बन डोलूँगी, अलख निरंजन बम भोले ।

 

 

***** हरीश चन्द्र लोहुमी

8 Comments

  1. nitin_shukla14 says:

    सुन्दर वर्णन हरीश जी
    जितनी तारीफ की जाये उतनी कम है
    बधाई

  2. rajivsrivastava says:

    thodi meethi thodi khatti–chatpati aanadmai rachna–aap ki lekhne ke shaaili badi hi nirali hai–badahai

    • Harish Chandra Lohumi says:

      @rajivsrivastava, आपकी दिलकश प्रतिक्रिया यूं ही मिलती रहे तो फिर कोई क्यों लिखने में कंजूसी करे राजीव जी !

  3. Vishvnand says:

    पढ़कर ऐसी सुन्दर रचना
    मन खुश होकर यूं बोले
    ऎसी सुन्दर रचना पढने
    हरदम हम वर माँगते रहते
    अलख निरंजन बम भोले …..

    अति प्रशंसनीय
    हार्दिक बधाई

  4. siddha Nath Singh says:

    sundar geet.

Leave a Reply