« »

बारिस का मौसम

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry, Sep 2011 Contest

बारिस का मौसम भी होता है लाजवाब

हर दिल लगता है गुनगुनाने,

रिमझिम-२ बरसता पानी,

पत्तो से बहता पानी,

किसानो के लिए लाता खुशियाँ , 

मट्टी से आती सोंधी-२ खुशबू ,

आंधी आती, बिजली साथ लाती,

वहाँ नाचता हुआ मयूर, 

मेढक वहाँ टर्राते हुए, 

इन्द्रधनुस बनाता गगन को सुंदर,  

ठंडी-२ हवा चलती चारो और ,

बारिस के मौसम में मन करता-

“खाए क्यों न समोसा, पकोड़ा और चाए  “

मेढक की तरह मन मेरा भी करता –

“निकलू बाहर, नाचूं, गाऊ, धूम मचाऊ, 

डूब जाऊ मैं भी मस्ती में,

भीग जाऊ मै पूरी तरह,”

सुहाना सा मौसम बनता चारों और,

नन्हे-२ बच्चे कागज को नाव बनबाते हुए,

 और उसको पानी में तैराते हुए,

बारिस का मोसम भी होता है लाजवाब,

बारिस के बाद आती चारों और हरियाली,
पर साथ ही कहीं लाता कीचड़, 

 कहीं गड्डों में भरता पानी 

तो कही होता ट्रेफ़िक जाम,

कहीं छेदों से घुसता घर में पानी

तो कहीं लोगों के काम बिगाड़ता,    

बारिस का मौसम भी होता है लाजवाब, कही ख़ुशी तो कहीं लाता परेशानी


 


3 Comments

  1. rajivsrivastava says:

    bahut aacha varnan barsat ke baad ka.lekhni aur bhi aachi ho sakti thi.bahut aacha prayash,badahai

  2. Vishvnand says:

    अच्छा वर्णन है.
    राजीव जी की टिप्पणी से पूर्ण सहमति. रचना में rhyme or rhythm पर ध्यान देना जरूरी है ..

  3. kalawati says:

    सुहाना सा मौसम बनता चारों और,
    नन्हे-२ बच्चे कागज को नाव बनबाते हुए,
    और उसको पानी में तैराते हुए,
    बारिस का मोसम भी होता है लाजवाब,
    सच में बचपन की याद दिला गयी ये कविता,
    वाह

Leave a Reply