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“उमंग नयी हो जोश भरा”

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Hindi Poetry

(काफ़ी दिनों बाद इस मंच पर आना संभव हो सका…समस्त गुनी कविजनों को मेरा सादर प्रणाम…अपनी एक और कोशिश के साथ फिर से आपके बीच हाज़िर हूँ…उम्मीद है आपका स्नेह (सही-सटीक प्रतिक्रिया के रूप में) मिलता रहेगा.)

 

दिन होता ज़िल्लत से शुरू और शाम ढले तानों से,

मुन्नी शीला सुन-सुन बेटी तंग आ गयी गानों से…

नारी की इज़्ज़त क्यूँ अब इतनी फ़िल्मी है?

भावुक कवि क्यूँ अब इतने निर्दयी ज़ुल्मी हैं?

 

जो कर सकते हैं चमत्कार, क्यूँ बना रहे बीमार?

हाय संस्कृति बेचारी क्यूँ बैठी है लाचार?

भारत देश दिया है हमने किन हाथों में?

भ्रष्टाचार घुसेड़ दिया है अब गानों में?

 

बहिष्कार ही है इलाज इस बीमारी का…

मुंहतोड़  जवाब हो पुरुस्कार इस लाचारी का…

अन्ना ही बस ख़र्चें जीवन, तिल-तिल मरने में…

हम सोयें अपने घर, हो मस्त इसी डरने में…

 

रमज़ान का ये पाक़ महीना, और बीता सावन झूमके…

क्यूँ न खाएँ हम भी क़समें, न उठें ये बादल धूल के…

आओ हाथ बढायें, भारत को स्वर्ग बनाने में…

उमंग नयी हो जोश भरा, अब आज ही से जीने में…

 

उमंग नयी हो जोश भरा, अब आज ही से जीने में…

 

((c) Painting in this poetry my original artwork. Copyright (c) 2011 @ Praveen Sharma.)

8 Comments

  1. renukakkar says:

    ठीक कहा आप ने ..आज कल के गानों मई पुराने गानों की मीठास नहीं मिलती

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @renukakkar, आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद् जी…

      आशा है आगे भी आप मुझे प्रोत्साहित करती रहेंगी… 🙂

  2. Vishvnand says:

    पढ़कर ये रचना है भरती मन में नयी उमंग
    जब हम पाते नव पीढी को भी अन्ना के संग
    आस जगी है नव पीढी फिर लाएगी आजादी
    भ्रष्टाचार विरोध चली जो जीतेंगे हम लड़ाई ….
    इस सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई
    आपके ऐसे आने पर भी बहुत खुशी है पायी …

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @Vishvnand, क्या बात है दादा…आप तो एवर ग्रीन हैं…आपकी चार पंक्तियाँ पढ़ते ही ताज़गी आ जाती है…

      इतनी सुन्दर प्रतिक्रिया एवं प्रोत्साहन के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद्…

      मंच पर निरंतरता बनाये रखने हेतु प्रयासरत हूँ… 🙂

  3. Harish Chandra Lohumi says:

    चित्रों के हिसाब से शब्दों संयोजन ठीक है.
    रचना से साफ़ ज़ाहिर हो रहा है कि कवि ने लेखनी को कई दिनों के बाद छुआ है.
    आगमन अच्छा लगा ! 🙂

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @Harish Chandra Lohumi, क्या बताऊं… अपनी कलम को ज़ंग लगने से बचाने की कोशिश में ऐसे ख़ूबसूरत हादसे हो जाते हैं… 🙂

      स्वागत हेतु आपका आभारी हूँ हरीश जी… 🙂

  4. siddha Nath Singh says:

    bahut khoob der aayad durust aayad.

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @siddha Nath Singh, दुरुस्त फ़रमाया आपने सिद्धनाथ जी…

      कोशिश करूँगा कि आगे से ये आना लगा रहे… 🙂

      और तारीफ़ के लिए शुक्रिया… 🙂

      (आप सभी ने ज़रूर बहुत अच्छी-अच्छी रचनायें लिखी होंगी, वो भी जल्दी-जल्दी पढनी हैं…)

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