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कुछ बदला सा !!!

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Anthology 2013 Entries, Hindi Poetry

दरकती रही ज़िन्दगी जुड़ने की चाहत में
उगते रहे ये पंख बस   उड़ने  की चाहत में !

पलकें जब भी उठाई अपने ही चेहरे से घबराई
दौडती रही रौशनी में बस अंधेरों से टकराई !

मुस्कुराते कई शब्द ! ख़ामोशी में बदल रहे
भावनाओं के किरदार एकाकीपन में उलझ रहे

मै बैठी रह जाती हूँ, विचार आगे बढ़ जाते हैं
मै कुछ  न कह पाती हूँ , मौन सब कह जाते हैं

उथल पुथल हुई है कहीं भीतर, कुछ गहरे में
इस शांत समंदर में, शायेद कुछ बदला सा है

6 Comments

  1. s n singh says:

    sundar kavita.

  2. chandan says:

    अति सुन्दर

  3. Vishvnand says:

    सुन्दर
    भावनाएं और रचना बहुत मनभायीं
    बधाई
    “उथल पुथल हुई है कहीं भीतर, कुछ गहरे में
    इस शांत समंदर में, शायेद कुछ बदला सा है …” बहुत रम्य अभिव्यक्ति

  4. pallawi says:

    dhanyabaad sir!!

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