« »

हो गए गोल मटोल

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

योग धर्म का ज्ञान नहीं पहना भगवा वेश
अब संतन की जात में धूर्तो की घुसपैठ ||1||
आचरण बिन व्यर्थ रहे ,भाषण और उपदेश
अब कोरे आश्वासन से ,पलता है परिवेश ||2||
आयु का प्रतिबन्ध नहीं उमर भले हो साठ
सतत पठन से खुल सकेगी तेरे मन की गाँठ ||3||
बेरोजगार युवा पीढ़ी ,जनसँख्या विस्फोट
क्षमताये विकलांग हुई ,व्यवस्था में खोट ||4||
आर्थिक परतंत्रता देश हित को चोट
नए गेट प्रस्ताव से होगी लूट खसोट ||5||
निष्ठाए तो नित्य बिकी मूल्य हुए नीलाम
चारित्रिक दुर्बलता से देश हुआ बदनाम||6||
सुविधाए अनमोल हुई, प्रतिभाये बेमोल
नेताजी निरक्षर थे ,हो गए गोल मटोल||7||

3 Comments

  1. siddha nath singh says:

    achchhi abhivyakti. meri raay me agar aap doha chhand me kuchh kahna chahte hain to ukt chhand kee maatrik banavat ka dhyan rakhen yah behtar hoga.

  2. Vishvnand says:

    बहुत अच्छी मनभावन रचना
    बधाई
    हाय! क्या इस माहौल का कोई नहीं उपाय
    अब इस भारत देश को भगवन ही जो बचाय

  3. N.S. Chouhan says:

    काफी अच्छी कविता है .—- वर्तमान परिवेश का तानाबाना है /

Leave a Reply