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वफ़ा भी भीख की मानिंद वो जताते हैं.

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Hindi Poetry

यों खूब ख्वाब की दुनिया में जगमगाते हैं,

वो रोशनी में मगर सच की चौंधियाते हैं.

 

बस आसमान में उड़ने में हैं फ़क़त माहिर,

पड़ें जो पाँव ज़मीं पर तो डगमगाते हैं.

 

बना रहे जो वफ़ा का भरम तो बेहतर है,

खुली हो धूप तो पौधे झुलस से जाते हैं.

 

तमाम रात परिंदे हैं भींगे   शबनम     में,

अब आयी  धूप तो सब पंख  फड़फडाते    हैं.

 

मुरव्वतों   को मुहब्बत का नाम देते हैं,   मुरव्वत-कृपा

वफ़ा भी भीख की मानिंद  वो जताते हैं.

 

चलो यहाँ से किसी और ही शहर को चलें,

यहाँ तो उससे बिछुड़ने के डर सताते हैं.

 

सुना है गोल है दुनिया उमीद क्यों छोड़ें,

वो फिर मिलेंगे यही दिल को हम बताते हैं.

 

बड़ी है तुर्श शराबे हयात क्या कीजे,   तुर्श-तीखी,हयात-जीवन  

सद एहतियात रखें, हाथ थरथराते हैं. सद एहतियात-सौ सावधानी

5 Comments

  1. विसंगतियों पर आपने अच्छा प्रकाश डाला
    गजल का हर शेर नई विसंगति उजागर करता है

  2. Gaurav Gupta says:

    I liked it very much..

  3. Harish Chandra Lohumi says:

    क्या बात है !
    जिगर में आता है सौ बार जा मिलूँ उनसे,
    मगर वो रोज एक नया पता बताते हैं.

  4. Rishabh Choudhary says:

    Simply Zabardast………….. Loved it !!!

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