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मै पूछता हुं, आखिर कब तक….

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Hindi Poetry

मै पूछता हुं, आखिर कब तक….
कब तक यह सब चलता रहेंगा…?

कब तक आतंकवाद की आग में
यूं ही पूरा देश जलता रहेंगा…?

कब तक देश का हर नेता सरे आम
यूं ही इन गुंडों के बाज़ार में बिकता रहेंगा…?

कब तक एक आम आदमी
यूं ही डरता रहेंगा…?

कब तक एक बेकसूर इंसान
यूं ही मरता रहेंगा…?

कब तक ए. राजा, कलमाड़ी जैसे देश द्रोही
और कसाब जेसा देश का दुश्मन
यूं ही सलाखों के पीछे सड़ता रहेगा…?

मै पूछता हुं, आखिर कब तक….
कब तक यह सब चलता रहेंगा…?

-जय हिंद…! वन्देमातरम…!
-अमित टी. शाह
14th July 2011

5 Comments

  1. kusumgokarn says:

    Fine extempore plea for sanity amidst sensless killing of innocents.
    Kusum

  2. Vishvnand says:

    बहुत खूब
    पर मतलब साफ़ है
    उनसे कुछ उम्मीद अब बड़ी नासमझी और अपना बेहद पागलपन है

    कब तक ? …. यूँही जबतक हम उनके बनाए अहिंसक गधे बने रहेंगे और जो भी इनसे लड़ने सही कदम उठाते है उन्हें तन मन धन और बल से support नही करेंगे. रिश्वतखोरों और देश को लूटनेवाले नेताओं का नामोहरण नहीं करेंगे जो आतंकवादियों को वर्षों से कोई शिक्षा न देकर और उनकी मेहमान नवाजी कर मानो उनका समर्थन कर रहे हैं …

  3. dil se dil tak says:

    आज देश में जो चल रहा है , वो ऐसे ही चलता रहेगा . देश की जनता को हर बार चुनाव के समय ठग लिया जाता है . बाकी ५ साल तक वो ही चलता है.

    आपने जो लिखा अच्छा लगा .

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