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आज तो ऐसे बरसी बरखा रानी…

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Hindi Poetry

आज तो ऐसे बरसी बरखा रानी,

कल तक जो निर्जीव था
आज वह फिरसे जीवित हो रहा है…!

कल तक बैठा हुआ वो लाचार पंखी
देखो आज कैसे अपने पंख फैला रहा है…!

कल तक सुखी पड़ी नदियों का पानीभी
आज सागर की तरफ बह रहा है…!

आसमान से बरसते लगातार जल को
देखो हर पेड़ कैसे गर्व से सेह रहा है…!

आज तो ऐसे बरसी बरखा रानी,
कि आसमान भी जैसे
कुछ कह रहा है…!

कभी गर्जना के जरिये
तो कभी बिजली गिरा कर,
अपने तेवर दिखा रहा है…!

कभी सूरज, तो कभी चाँद
बारी बारी से बादलों के संग,
लुका-छुपी का खेल-
खेल रहा है…!

आज तो ऐसे बरसी बरखा रानी,
कि हर मौसम जैसे एक हो रहा है…!

प्रणय की चिंगारी ऐसी जली
कि दो बदन भी एक हो रहा है…!

कल तक कुदरत को लांछन लगाने वाला
इंसान भी आज तो नेक हो रहा है…!

आज तो ऐसे बरसी बरखा रानी,
कि हर तरफ बस
खुशियों का ही अभिषेक हो रहा है..!

इश्वर भी आज तो
इतना खुश हो रहा है…
कि मन ही मन जैसे कह रहा हो,
“देख, तुझे जो चाहिए था
वो सब आज पृथ्वी पर होते हुए
तू देख रहा है…!”

आज तो ऐसे बरसी बरखा रानी,
कि सब कुछ जैसे बदल रहा है…!

– अमित टी. शाह (M.A.S.)
22nd June 2011

4 Comments

  1. siddhanathsingh says:

    bahut khoob mausam par ab kam hi kavitayen likhi jati hain, shayad shahar me mausam baarish ke alava kab aaya kab gaya pata bhi nahin chalta.

    • amit478874 says:

      @siddhanathsingh, आप का हार्दिक धन्यवाद आप की इस उत्साहवर्धक कोमेंट के लिए…! और बिलकुल सही बात बताई आप ने शहर के बारे में..! मै खुद बचपन से गाँव में रहा हुं और बस कुछ सालो से ही शहर में रह रहा हु, तो इस फर्क को अच्छी तरह समझ सकता हु…!
      “संभल कर चलना, यह शहर बड़ा धोखेबाज़ है…
      यहाँपे हर मौसम का एक अनोखा आगाज़ है…” 🙂

  2. Vishvnand says:

    सुन्दर रचना
    बहुत मन भायी ..
    हार्दिक बधाई

    “आज तो ऐसे बरसी बरखा रानी,
    कि हर तरफ बस
    खुशियों का ही अभिषेक हो रहा है..!”
    “आज तो ऐसे बरसी बरखा रानी,
    कि सब कुछ जैसे बदल रहा है…!” सन्दर्भ की अति सुन्दर भावपूर्ण पंक्तियाँ

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