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रूठ मनाना पछताना झरती मोती की लड़ियाँ

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Hindi Poetry

रूठ मनाना पछताना झरती
मोती की लड़ियाँ

रह-रह मन क्यों जोड़ रहे
बिखरी यादों की कड़ियाँ

मैं तो था अंदर तुमने
बाहर की राह दिखाई

जो कुछ दिया लिया हंस
मैंने दर-दर ठोकर खाई

गढ़ा तुम्हें हर मूरत में
हारा मैं दिल बहलाता

पाई केवल प्यास अनबुझी
टूटा कभी न  नाता

रहा सदा ही प्रेम
तुम्हारा कितनी शकलें पाईं

रही सदा बेचैन रूह रट नाम
तुम्हारा  आई

हाँ मन पागल था है हरदम तेरे
लिये रहेगा

इक-दूजे के लिये बने हम हरदम
यही कहेगा

जनम बीत जाएँ चाहे जब-तक टूटे
न मिलेंगे

मुरझाए तन-मन के प्यासे फूल
न कभी खिलेंगे

संगिनि साथ तुम्हारे दुख
भी मेरा सुख है दूना

रह-रह तुझे पुकारे मन तुझ
बिन है सूना-सूना

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2 Comments

  1. siddhanathsingh says:

    ab vaqt aa gaya hai ki vafa kee gali se nikal ke aur bhi tasveeren dekhi jaayen.

  2. Vishvnand says:

    यह है अति सुन्दर प्रेम विचार दर्शन
    सुख देवे हिरदय और मन
    रचना लगी अलग सी सौन्दर्यपूर्ण

    Hearty commends
    stars 5

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