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क्यों मयूरा सबके सम्मुख रो रहा

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Hindi Poetry

क्यों मयूरा सबके सम्मुख रो रहा
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अब हकीकत आ गयी है सामने,
जब खुली लोई सभी के सामने .

दाग बदनामी का फ़िर तोहफ़ा दिया,
हम से जुड़ कर इस तुम्हारे नाम ने .

क्यों खिलौना बीच रस्ते में रुका,
कम भरीं फ़िर चाभियाँ क्या राम ने .

क्यों मयूरा सबके सम्मुख रो रहा,
दिख चुके क्या पैर सबके सामने .

अपने कर्मों से कभी वह मर चुका,
बन खडा हैं प्रेत सबके सामने .

खोखले वादों का झोला फ़ट गया,
उफ़ ,फ़ज़ीहत कर दई इस झाम ने .

***** हरीश चन्द्र लोहुमी

4 Comments

  1. siddha Nath Singh says:

    he mayura pair ve hi naachte,
    baat kahne ki kala ye khoob hai
    ped chhaya sirf sar ko de saken
    paanv ko thandak to deti doob hai.

  2. Jaspal Kaur says:

    बहुत खूब

  3. amit478874 says:

    बहुत ही बढियाँ, हरीशजी..! 🙂

  4. Vishvnand says:

    बहुत खूब, अलग सी, गहन और अर्थपूर्ण प्रशंसनीय रचना
    हर छंद बहुत मन भाये
    हार्दिक बधाई

    खैरियत समझो की अबतक खैर है
    नंगे होते जायेंगे सब सामने ….!

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