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छबि श्यामा उदास इक जिसपर दिल को मैने हार दिया

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Hindi Poetry

 

छबि श्यामा उदास इक जिस पर दिल को मैने हार दिया

बन्धी विवश ज़न्ज़ीरों की प्रतिमा से मैने प्यार किया

कहां निहारे आंख न थकती इक-दूजे दिल रूठ मनाता

कहां तड़पते विरह अश्रु के इक-दूजे बिन चैन न आता

दिन-पल-छिन ऐसा न एक जब मुझको तेरी याद न आई

चुकी मनाती सांस वफ़ा पर हार बेवफ़ा तुझसे आई

मेरीतेरी किस्मत कैसी क्या रिश्ता क्या कैसा था नाता

अगर विरह था भाग्य मिले क्यों रहा वाम क्यों क्रूर विधाता

 

One Comment

  1. siddha Nath Singh says:

    bahut khoob.

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