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Idiot Box

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Hindi Poetry

ईडिएट बॉक्स

सब कहते हैं, ईडियट बॉक्स,
इसे उठाकर फेंक देने की,
मम्मी, धमकी भी रोज-रोज देती है
पढ़ने, खाने, सोने, की मुझको
सुध जो नहीं रहती है

बिना बात मैं हँस पड़ता हूँ
तब डॉट बहुत पड़ती है
देखकर मि.बीन को हँसी बहुत आती है
और बेचारी मम्मी समझ नहीं पाती है
कह दूँगा मैं सबसे, ये मेरा सच्चा साथी है

रोया था स्कूल में उस दिन
गहरी चोट लगी थी,
खूब छकाया सबने, ठेरों खून बहाया था
घर आया तो देखा मैंने
ना जन कोई, ना उसका साया था
तब टी.वी. ने ही पुचकारा
बज़, वूडी, स्टिंकी, ने दुलरा कर,
गहरी नींद सुलाया था

छुट्टी के दिन किटी-पार्टी,
कभी ताष जमता है
झिड़का जाता है मुझको,
यदि मन, उधर का रुख करता है
फिर ‘टकाषी’ खेल दिखाकर
मुझे मना लेता है………
हँसा-हँसाकर जाफरी भइया
लोट-पोट कर देता है

तपता हूँ मैं जब बुखार से
बहुत अकेला होता हूँ
कड़वी दवा और खिचड़ी रखकर,
म ऑफिस जाती है, तब…
मिक्की माउस आकर मुझको,
सोते से जगाता है…..
कूद कूदकर उछल उछलकर,
मेरा मन बहलाता है
पी जाता हूँ, दवा कड़वी मैं…
और माँ खुष हो जाती है.

इस बक्से को ईडियट न कहना,
मम्मी मुझको चाहे जो कह लो,
मेरा साथी, मेरा दोस्त, यह मेरा खिलौना है,
इसको तो मेरे पास ही रहने दो………
मेरे पास रहने दो न…………….

सुधा गोयल ’नवीन‘

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    सुन्दर अर्थपूर्ण रचना.
    बहुत अच्छी,
    बधाई

    TV पर कुछ बच्चों के प्रोग्राम बहुत अच्छे मनोरजक और informative होते हैं. उन्हें बच्चों को देखने से रोकना अनुचित है. हो सके तो बड़ों ने भी उन प्रोग्राम को बच्चों के साथ देखना चाहिए. 🙂

    • sudha goel says:

      @Vishvnand,
      धन्यवाद विश्वनंद जी !
      आपके विचार से मैं पूरी तरह सहमत हूँ.
      बच्चों की मानसिकता समझ कर व्यवहार करने से बच्चों का स्वस्थ विकास होता है.

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