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पल-पल तुमको याद किया तुमको क्यों याद न आया

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Hindi Poetry

पल-पल तुमको याद किया
तुमको क्यों याद न आया

मैं न कभी भूला तुमको
तुमने क्यों मुझे भुलाया

जैसी थीं जो थीं दुनिया
की नज़रों में तुम प्यारी

तरस रहे सौ-सौ प्राणों से
तुम पर था मैं वारी

संग-संग रोया तड़पा मैं
दिल के साथ तुम्हारे

आंसू पोछ सका न कभी
दुनिया के भय के मारे

मुखड़ा श्यामल कुम्हलाया
नयनों में बसी उदासी

अधरों पर मुस्कान देखने
तरसी अंखियाँ प्यासी

जाने कितने कहर हुए क्या
बीता रहीं छुपातीं

‘हुआ न कुछ चिंता न करो’
कह तुम मुझको बहलातीं

रहा नहीं नि:संग कभी मन
संग-संग तेरे डोला

जाने कैसी होगी तुम सोचे
तड़पा मन बोला

वह गुस्सा वह लाचारी वह
गैरों का बहकाना

वह रूठना मनाना पछता
आँखों का भर आना

मिलन अधूरा सदा बिछुरने
का भय रहा समाया

दूर हुए लिपटा संग तेरे
मन मिलनातुर पाया

बरस-बरस भीगी रातें
करवट-करवट मैं रोया

बिछुरे पल मन भीगा यादों
में मिलने फिर खोया

8 Comments

  1. siddha Nath Singh says:

    virah shringar ke ras me lipati panktiyaan.

    • pabitraprem says:

      प्रेरक टिप्पणी और गुणग्राहिता के लिए धन्यवाद सिद्धजी.

  2. renukakkar says:

    depth of extremely sad emotions depicted

  3. Vikash says:

    Please put title of your poems as well. Poems without the title will not be accessible for others.

    • pabitraprem says:

      यादध्यानी के लिए शुक्रिया. देखिये भूल सुधार ली.

  4. pabitraprem says:

    गुणग्राहिता और प्रेरक टिप्पणी के लिए धन्यवाद सिद्धजी .

  5. pabitraprem says:

    स्मरण कराने के लिए धन्यवाद विकास जी. लीजिये मैंने भूल सुधार दी .

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