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किसी की वो हस्ती मिटाने चले हैं

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Hindi Poetry

किसी की वो हस्ती मिटाने चले हैं

 

अजब हुस्न वालों की करतूत देखो,

शहर   घूमने   के   बहाने    चले  हैं ।

 

अदाएँ हैं कातिल नज़र कातिलाना,

किसी  को  निशाना  बनाने चले हैं ।

 

जिगर में न जाने छुपा उनके क्या-क्या,

फरेबों   में   उलझा,   फँसाने   चले   हैं ।

 

अज़ब  माज़रा  है   अज़ब   सी   पहेली,

न   जाने   किसे   आज़माने   चले   हैं ।

 

बड़े   ही   शिकारी   बहुत   हैं   सयाने,

किसी  की वो हस्ती  मिटाने चले हैं ।

 

ठिकाना   दिलाने  की   करते  हैं  बातें,

मगर   वो   ठिकाने   लगाने   चले   हैं।

 

 

***** हरीश चन्द्र लोहुमी

16 Comments

  1. Vishvnand says:

    बहुत खूब, बढ़िया और मनभावन

    नजर उनपे इतनी है क्यूँ ये भी अपनी
    क्या उनपर ये दिल हम लुटाने चले हैं …..? 🙂

    • Harish Chandra Lohumi says:

      @Vishvnand,
      प्रतिक्रया का हार्दिक धन्यवाद सर !

      नज़र उनपे रखना बहुत है जरूरी,
      आत्मघाती बम वो लगाके चले हैं. 🙂

  2. santosh bhauwala says:

    बहुत ही खूबसूरत अंदाज की रचना , बधाई !!

  3. manojbharat says:

    बहुत सुंदर मुहावरेदार भाषा का प्रयोग.

    बधाई .

  4. Jaspal Kaur says:

    bahut sunder rachna

  5. siddha Nath Singh says:

    kya kya shandaar band pesh kiye aapne. subhaan allah.

  6. rajendra sharma 'vivek' says:

    bhai saab aapki ukt rachanaa se mujhe ajhar hashmi ji ki ye panktiyaa yaad aai
    ‘हुआ विश्वास खंडित दुःख नहीं मुझको तो ये दुःख है
    हितैषी बन कर लोगो ने मेरे विश्वास को तोड़ा
    भयंकर बाढ़ में उम्मीद जिस माझी थी उसने
    सुरक्षा का वचन देकर भवर के बीच में छोड़ा

    सुंदर रचना के लिए बधाई

  7. Rajeev Ranjan says:

    गजब की हस्ती !!
    बहुत बहुत बधाइयाँ !

    • Harish Chandra Lohumi says:

      @Rajeev Ranjan, अपना कीमती समय देने के लिए हार्दिक आभार और धन्यवाद सर जी !

  8. sushil sarna says:

    काबिले तारीफ़ रचना- चन्द लाईनें

    बातों बातों में आप दिलों को लुभाने चले हैं,
    कातिल नजरों के जुर्म को छुपाने चले हैं
    कसूर किसने किया ये खबर क्या किसे
    दर से अपनों के हम हो के बेगाने चले हैं

    इस सुंदर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई हरीश भाई

    • Harish Chandra Lohumi says:

      @sushil sarna, इस सुन्दर और मधुर प्रशंसा के लिए हार्दिक आभार सरना साहब ! आपकी तारीफ़ मायने रखती है मेरे लिए !

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